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इधर भारत आजाद हुआ, उधर अफगानिस्तान की बदलने लगी थी तस्वीर 

बीबीसी हिंदी Updated Fri, 09 Feb 2018 04:19 PM IST
Before the year 1949, Afghanistan's picture was different like this time
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क्या अफगानिस्तान आज जैसा है, वैसा ही उसका अतीत भी था? हाल ही में एक पुरानी अफगान मैगजीन का डिजिटल वर्जन जारी किया गया तो ऐसा लगा जैसे कोई पुराना मौसम अचानक लौट आया हो। रंग बिरंगे, खूबसूरत और जानकारी से भरे हुए 'जवानदुन' (जिंदगी) मैगजीन के नए डिजिटल किए गए पन्ने सामाजिक और राजनीतिक बदलाव के दौर में अफगानिस्तान के अमीर तबके के लोगों की तमन्नाओं का दस्तावेज हैं। ये मैगजीन बीसवीं सदी के दूसरे हिस्से में लंबे समय तक पब्लिश होती रही थी। 
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इस मैगजीन में वैश्विक मामलों, सामाजिक मुद्दे और इतिहास से जुड़े लेखों के अलावा फैशन और फिल्मी सितारों पर भी कॉलम होते थे। 'टाइम' मैगजीन जैसी ही थी 'जवानदुन', बस इसमें कहानियों और कविताओं के लिए भी जगह थी। राजनीतिक उतार-चढ़ावों से भरे पांच दशकों में 'जवानदुन' के पन्ने पर उस दौर की उथलपुथल दिखाई देती थी। इसके अलावा इन पन्नों पर एक नाजुक पक्ष भी होता था- वो था पाठकों के सपने और उम्मीदें। 
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ये वो दौर था जब यूरोपीय साम्राज्य की ताकतें दूसरे विश्व युद्ध के बाद अपना असर खो रहीं थीं

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