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आधे दर्जन देश मिलकर भी कतर को क्यों नहीं झुका पाए

बीबीसी हिंदी Updated Fri, 07 Dec 2018 03:23 PM IST
Qatar Quits OPEC
Qatar Quits OPEC - फोटो : File Photo
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शक्तिशाली और प्रतिद्वंद्वी पड़ोसी सऊदी अरब की द्वीप बना देने की धमकी, पूरी तरह से आर्थिक नाकेबंदी और अपने हवाई क्षेत्रों पर भी पूरी तरह से पाबंदी के बावजूद कतर कमजोर क्यों नहीं पड़ा? दूसरा सवाल यह कि सऊदी की कोई भी रणनीति कतर को झुका क्यों नहीं पाई?
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इस दौरान कतर न केवल संपन्न हुआ है बल्कि उसने मानवाधिकार के रिकॉर्ड को भी ठीक किया है। 25 लाख की आबादी वाले इस छोटे से देश ने तेल निर्यातक देशों के समूह ओपेक से बाहर निकलने की घोषणा सऊदी को बैकफुट पर ला दिया है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार कतर की अर्थव्यवस्था 2.6 फीसदी की वृद्धि दर से आगे बढ़ रही है जबकि 2017 में यह वृद्धि दर 2.1 फीसदी थी। यहां तक कि मुल्क के राजस्व घाटे में 2016 की तुलना में कमी आई है। फोर्ब्स के अनुसार कतर का विदेशी मुद्रा भंडार 2.9 अरब डॉलर से 17 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

कतर के खिलाफ सऊदी अरब के नेतृत्व में आधे दर्जन देश हैं फिर भी ये झुकाने में नाकाम रहे। कतर दुनिया के मानचित्र पर आकार में बहुत छोटा सा देश है, जिसका क्षेत्रफल महज 11,437 वर्ग किलोमीटर है जबकि आबादी केवल 25 लाख। इनमें भी 90 फीसदी प्रवासी हैं।

ये वो देश है जिस पर उसके पड़ोसी और ताकतवर मुल्क सऊदी अरब और इसके सहयोगी देशों बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और मिस्र ने आर्थिक और राजनयिक प्रतिबंध लगा रखे हैं। 18 महीने बाद भी फिलहाल किसी समाधान की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही।

सोमवार को कतर ने ओपेक से अलग होने की घोषणा की थी और अब संभावना जताई जा रही है कि वो गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) यानी खाड़ी सहयोग परिषद से भी अलग हो सकता है। जीसीसी की रविवार यानी नौ दिसंबर से रियाद में बैठक होने वाली है।

खाड़ी देशों पर नजर रखने वाले जानकारों के मुताबिक कतर यदि ऐसा करता है तो उस पर नकेल कसने की तमाम कोशिशों में जुटे सऊदी अरब को न केवल खीझ होगी बल्कि इससे वो खासा परेशान भी होगा क्योंकि पिछले 18 महीने से उसने इस छोटे से मुल्क के चारों ओर आर्थिक और राजनयिक नाकेबंदी कर रखी है।

कतर के पूर्व शासक शेख अब्दुल्ला बिन कासिम अल थानी ने ट्वीट किया कि ओपेक का इस्तेमाल हमारे राष्ट्रीय हित को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। जीसीसी देशों में कतर पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने वाले दो देश सऊदी अरब और यूएई बड़े प्लेयर है। जीसीसी अब तक कतर की लगी आर्थिक नाकेबंदी को सुलझाने में नाकाम रही है। इससे जीसीसी की सीमाओं का अंदाजा पता चलता है।
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जीसीसी, कतर और सऊदी अरब

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