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सैन्य तख्तापलटः म्यांमार में फैलते डर के बावजूद अडिग हैं लोकतंत्र समर्थक आंदोलनकारी

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यंगून Published by: संजीव कुमार झा Updated Sat, 20 Feb 2021 09:36 PM IST
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म्यांमार में प्रदर्शन
म्यांमार में प्रदर्शन - फोटो : सोशल मीडिया

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म्यांमार में सैनिक शासन के खिलाफ जन प्रदर्शनों का दौर जारी है, लेकिन अब प्रदर्शनकारियों पर सरकारी कार्रवाई अधिक सख्त होती जा रही है। सैन्य तख्ता पलट के साथ ही देश में जन प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हो गया था। लोगों ने इस दौरान अपना विरोध जताने के लिए बर्तन और ढोल बजाने, जुलूस निकालने और तरह- तरह के निशानों को लहराने के तरीके अपनाए हैं। इनके अलावा बहुत से सरकारी और कई कारखानों के कर्मचारियों ने हड़ताल करके विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया है। लेकिन अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक अब विरोध प्रदर्शनों के आयोजकों में भय फैलता जा रहा है।
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शनिवार को म्यांमार ने सुरक्षा बलों ने एक स्थान पर जमा हुए प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए गोलियां चला दीं। जानकारी के अनुसार इस घटना में कई लोग घायल हुए हैं और एक व्यक्ति की मौत हो गई है।


पूरे म्यांमार में रात आठ बजे से सुबह चार बजे तक रात का कर्फ्यू लगा दिया जाता है। इसके अलावा इंटरनेट की सेवाएं अभी भी बंद हैं। रात में कई जगहों पर सैनिक लोगों को उनके बिस्तरों से खींच कर ले गए हैं। सुबह- सुबह सैनिक शासकों के विरोधियों के घरों पर छापे मारे जा रहे हैं। इस तरह काफी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया है। इन लोगों पर अस्पष्ट धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक इस कारण प्रदर्शनों के ज्यादातर आयोजक रात अपने घर पर नहीं गुजार रहे हैं। कई बार पूरी उनकी रात छिपने की जगह तलाशते हुए गुजर जाती है। 29 वर्षीय मानव अधिकार कार्यकर्ता थिनजार शुनलेई यी ने सीएनएन से कहा- ‘यह मानसिक और शारीरिक- दोनों स्तरों पर संघर्ष है। हर रोज हमें यह नहीं मालूम रहता कि आज की रात क्या होगा।’ थिनजार शुनलेई यी ने कहा कि नई पीढ़ी लोकतंत्र का अनुभव कर चुकी है और वह नहीं चाहती कि यह उनके हाथ से निकल जाए। इसलिए वे ये लड़ाई लड़ रहे हैं। नौजवानों को पिछली पीढ़ियों के लोगों का भी समर्थन मिल रहा है, जिन्हें मालूम है कि सैनिक शासन का मतलब क्या होता है।

म्यामांर में सेना ने एक फरवरी को तड़के सत्ता हथिया ली थी। उसके कुछ घंटों के बाद ही नव- निर्वाचित संसद की पहली बैठक होने वाली थी। तख्ता पलट करने वाले सैन्य अफसरों ने कहा कि पिछले चुनाव में धांधली हुई थी, इसलिए उन्हें तख्ता पलट का कदम उठाना पड़ा। लेकिन जिस बड़े पैमाने पर पिछले 20 दिन में जन प्रदर्शन हुए हैं, उससे साफ है कि देश के जनमत ने सैन्य शासकों के दावे को ठुकरा दिया है।
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प्रदर्शनकारी मुआंग हुए लापता

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