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Dart Mission: नासा के डार्ट मिशन की तस्वीरें आईं सामने, अंतरिक्ष में हजारों किमी. में फैले एस्टेरॉयड के टुकड़े

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वांशिगटन Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 29 Sep 2022 10:47 PM IST
सार

डार्ट मिशन का यह यान पृथ्वी से करीब 10 माह पहले रवाना हुआ था। इसे धरती की रक्षा के लिए जानबूझकर डिमोर्फोस एस्टेरॉयड से टकराया जा रहा है। 24,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से यात्रा कर रहा डार्ट डिमोर्फोस से टकराया था।
 

नासा का डार्ट मिशन।
नासा का डार्ट मिशन। - फोटो : social media
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विस्तार

पृथ्वी की तरफ आने वाले उल्कापिंड से पृथ्वी की रक्षा करने के लिए नासा द्वारा सोमवार को किया गया डार्ट मिशन सफल रहा। इस मिशन के तहत अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ‘नासा’ के एक अंतरिक्ष यान ने परीक्षण के तहत एक क्षुद्रग्रह (एस्टेरॉयड) को सफलतापूर्वक टक्कर मारी जिसके बाद एस्टेरॉयड चूर-चूर हो गया। इस मिशन की तस्वीरों को जेम्स वेब और हबल स्पेस टेलीस्कोप से ली गई तस्वीरें गुरुवार को जारी की गईं। नासा के इस मिशन पर दुनियाभर के अंतरिक्ष विज्ञानियों की नजर थीं। इस परीक्षण से वैज्ञानिकों ने यह पता लगाने की कोशिश की है कि क्या पृथ्वी की तरफ आने वाले किसी उल्कापिंड को टक्कर मारकर उसकी दिशा बदली जा सकती है, ताकि धरती की रक्षा हो सके।



इस मिशन के दौरान पूरे घटनाक्रम और उसके प्रभाव पर जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप और हबल टेलीस्कोप सहित तमाम कैमरों और टेलीस्कोप से यान पर नजर रखी जा रही थी। पृथ्वी से जुड़ी दूरबीनों द्वारा ली गई छवियों में टक्कर के बाद डिमोर्फोस से बाहर निकलने वाले धूल के एक विशाल बादल को दिखाया गया है। 


क्वीन यूनिवर्सिटी बेलफास्ट के खगोलशास्त्री एलन फिट्ज़सिमन्स ने इस परीक्षण के बारे में बताते हुए कहा कि यह वास्तव में काफी शानदार है। जेम्स वेब और हबल स्पेस टेलीस्कोप से ली गई तस्वीरों को जूम करके देखने पर पता चलता है कि टक्कर के बाद एस्टेरॉयड के टुकड़े अंतरिक्ष में हजारों किलोमीटर से अधिक की दूरी तक फैल गए। खगोलशास्त्री एलन फिट्ज़सिमन्स एटलस परियोजना में शामिल थे।

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के बयान के मुताबिक, जेम्स वेब के नियर-इन्फ्रारेड कैमरा (NIRCam) द्वारा डार्ट के चार घंटे बाद, की ली गई एक तस्वीर में डिमोर्फोस के आसपास बिखरे मलबे की धाराएं देखी जा सकती हैं। वहीं, 22 मिनट, पांच घंटे और आठ घंटे के बाद की तस्वीरों में बढ़ते स्प्रे दिख रही थी। ईएसए के हेरा मिशन के प्रबंधक कार्नेली ने कहा कि ये फोटोज एक ऐसे प्रभाव को दर्शाती हैं जो हमारी अपेक्षा से बहुत बड़ा है। उन्होंने कहा कि मैं वास्तव में चिंतित था कि डिमोर्फोस के पास कुछ भी नहीं बचा था। 

वहीं मिशन की सफलता को लेकर भारतीय वैज्ञानिकों की प्रतिक्रिया भी सामने आई थी। भारतीय वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारे जीवनकाल में पृथ्वी से किसी क्षुद्रग्रह के टकराने की आशंका बहुत कम है। बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स के वैज्ञानिक क्रिसफिन कार्तिक कहते हैं, 'हम कई क्षुद्रग्रहों और धूमकेतुओं से घिरे हुए हैं जो हमारे सूर्य की परिक्रमा करते हैं। उनमें से बहुत कम पृथ्वी के लिए खतरनाक हैं। फिर भी पृथ्वी के भविष्य की सुरक्षा की तैयारी करना अच्छा कदम है।' 

डिमोर्फोस, पृथ्वी से 96 लाख किलोमीटर दूर है। इसका नाम ग्रीक भाषा के शब्द ‘डिडिमोस‘ पर आधारित है। इसका अर्थ जुड़वां होता है। असल में यह 2500 फीट के क्षुद्रग्रह ‘डिडिमोस‘ का हिस्सा है। डिडिमोस की खोज 1996 में की गई थी। डिमोर्फोस करीब 525 फीट लंबा है और यह डिडिमोस से 1.2 किलोमीटर की दूरी पर परिक्रमा कर रहा है। 
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नासा के इस डार्ट मिशन में एक ही उपकरण होता है। इसका काम एस्टेरॉयड का पीछा करना, उसे निशाना बनाना और उसकी दिशा बदलना है। इस प्रक्रिया में एस्टेरॉयड खंड-खंड होकर मलबे के ढेर में बदल जाता है। हालांकि नासा के इस अहम मिशन की कामयाबी के सत्यापन में कुछ सप्ताह का वक्त लगेगा। इसके बाद ही पता चलेगा कि नासा इस मामले में कितना कामयाब रहा। 

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