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10 हफ्तों में खाली हो जाएगा पाकिस्तान का खजाना

बीबीसी, हिंदी Updated Tue, 29 May 2018 03:31 PM IST
पाकिस्तानी मुद्रा
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पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ महीनों से भारी संकट में जाती दिख रही है, लेकिन वहां की राजनीति में सेना बनाम सरकार की लड़ाई थम नहीं रही है। पाकिस्तानी मुद्रा अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना मूल्य लगातार खो रही है। एक अमरीकी डॉलर की तुलना में पाकिस्तानी रुपए की कीमत 120 रुपए तक चली गई। इसके साथ ही पाकिस्तान विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार हो रही कमी से भी जूझ रहा है।
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पाकिस्तान के पास अब 10.3 अरब डॉलर का ही विदेशी मुद्रा भंडार है, जो पिछले साल मई में 16.4 अरब डॉलर था। पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन का कहना है कि पाकिस्तान भुगतान संकट से निपटने के लिए एक बार फिर चीन की शरण में जा रहा है और एक से दो अरब डॉलर का कर्ज ले सकता है। पाकिस्तान में जुलाई महीने में आम चुनाव होने वाले हैं और चुनाव के बाद पाकिस्तान आईएमएफ की शरण में भी जा सकता है। इससे पहले पाकिस्तान ने 2013 में आईएमएफ का दरवाजा खटखटाया था।

10 हफ्तों तक ही आयात के लिए विदेशी मुद्रा

फाइनेंशियल टाइम्स का कहना है कि पाकिस्तान के पास जितनी विदेशी मुद्रा है वो 10 हफ्तों की आयात के ही बराबर है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार विदेशों में नौकरी कर रहे पाकिस्तानी देश में जो पैसे भेजते थे उसमें गिरावट आई है। इसके साथ ही पाकिस्तान का आयात बढ़ा है और चाइना पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर में लगी कंपनियों को भारी भुगतान के कारण भी विदेशी मुद्रा भंडार खाली हो रहा है। चीन पाकिस्तान कॉरिडोर 60 अरब डॉलर की महत्वाकांक्षी परियोजना है।

विश्व बैंक ने अक्टूबर महीने में पाकिस्तान को चेतावनी दी थी कि उसे कर्ज भुगतान और करेंट अकाउंट घाटे को पाटने के लिए इस साल 17 अरब डॉलर की जरूरत पड़ेगी। पाकिस्तान का तर्क था कि विदेशों में बसे अमीर पाकिस्तानियों को अगर अच्छे लाभ का लालच दिया जाए तो वो अपने देश की मदद कर सकते हैं। पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक के एक अधिकारी ने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा था कि अगर प्रवासी पाकिस्तानियों को अच्छे लाभ का ऑफर दिया जाएगा तो देश में पैसे भेजेंगे।

संकट में पाकिस्तान

उस अधिकारी ने कहा था कि प्रवासियों से पाकिस्तान को एक अरब डॉलर की जरूरत है। चीन का पकिस्तान पर कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है। समचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार जून में खत्म हो रहे इस वित्तीय वर्ष तक पाकिस्तान चीन से पांच अरब डॉलर का कर्ज ले चुका है। अमेरीका की कमान डोनाल्ड ट्रंप के हाथों में आने के बाद से पाकिस्तान को मिलने वाली आर्थिक मदद में अमेरीका ने भारी कटौती की है। हाल ही में अमेरीकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने कहा है कि पाकिस्तान के साथ अमरीका के रिश्ते पूरी तरह से पटरी से उतर गए हैं।

उन्होंने कहा कि अगले साल तक पाकिस्तान की मिलने वाली आर्थिक मदद में और कटौती होगी। पाकिस्तान और अमेरीका के खराब हुए संबंधों के कारण चीन की अहमियत बढ़ गई है। मतलब पाकिस्तान की निर्भरता चीन पर लगातार बढ़ रही है। आईएमएफ के अनुसार पाकिस्तान पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। 2009 से 2018 के बीच पाकिस्तान पर विदेशी कर्ज 50 फीसदी बढ़ा है। 2013 में पाकिस्तान को आईएमएफ ने 6.7 अरब डॉलर का पैकेज दिया था।
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