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आर्थिक संकट का असरः गरीबी में पाकिस्तानी सेना ने भी घटाया अपना बजट

बीबीसी Updated Wed, 05 Jun 2019 01:11 PM IST
पाकिस्तानी फौज ने घटाया बजट
पाकिस्तानी फौज ने घटाया बजट - फोटो : सोशल मीडिया
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आर्थिक संकट से गुजर रहे पाकिस्तान की सेना ने अपने खर्चों में कटौती की घोषणा की है। पाकिस्तानी सेना को अगले वित्तीय वर्ष के लिए अपने रक्षा बजट में कटौती पर मजबूर होना पड़ा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने सेना के इस फैसले का स्वागत किया है।
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इमरान खान ने ट्वीट किया, ''कई सुरक्षा चुनौतियों के बावजूद आर्थिक संकट की घड़ी में सेना की ओर से अपने खर्चे में की कटौती के फैसले का स्वागत करता हूं। हम इन बचाए गए रुपयों को बलूचिस्तान और कबायली इलाकों में खर्च करेंगे।'' पाक सेना के इस कदम के बारे में प्रधानमंत्री इमरान खान ने ट्वीट कर जानकारी दी थी।

इसके बाद पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफ़्फूर ने ट्वीट कर कहा, ''एक साल के लिए सेना के डिफेंस बजट में कटौती का देश की सुरक्षा पर कोई असर नहीं होगा। हम हर खतरे को असरदार तरीके से जवाब देंगे। तीन सर्विस इस कटौती से होने वाले प्रभाव को संभालने का काम करेंगी। बलूचिस्तान और ट्राइबल इलाकों की बेहतरी के लिए ये एक जरूरी कदम था।''

पाकिस्तान ट्रिब्यून अखबार ने वित्त मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से बताया है अगले वित्तीय वर्ष का अनुमानित रक्षा बजट 1.270 ट्रिलियन रुपए है जो कि खत्म होते वित्तीय वर्ष के रक्षा बजट से 170 अरब रुपए ज्यादा है। इस बजट में पूर्व सैनिकों की पेंशन, रणनीतिक खर्च और स्पेशल सैन्य पैकेज में होने वाले खर्च शामिल हैं।
पाक सेना के फैसले की तारीफ
पाकिस्तानी सेना ने अपने खर्चों में खुद से कटौती की तो सोशल मीडिया पर तारीफ होने लगी। डॉ आएशा नाम की यूजर ने लिखा, ''पाकिस्तान के इतिहास में ये पहली बार हो रहा है, जब सेना अपने बजट में खुद से कटौती कर रही है। सेना आप वाकई इज्जत के काबिल हैं।''

जुबैर ने लिखा, ''ये एक तारीफ लायक कदम है। उम्मीद करते हैं कि फंड मुहैया कराते हुए पारदर्शिता बरती जाएगी।'' अब सेना ने भले ही रक्षा बजट में कटौती की बात की है लेकिन फरवरी में पाकिस्तानी सरकार ने ये फैसला किया था कि देश के रक्षा बजट में किसी तरह की कटौती नहीं की जाएगी।

इसी दौर में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में सर्जिकल स्ट्राइक करने का दावा किया था। तब दोनों देशों के बीच युद्ध जैसे हालात हो गए थे। हालांकि भारतीय वायुसेना के पायलट विंग कमांडर अभिनंदन की वापसी के बाद दोनों देशों के बीच हालात सामान्य होने लगे थे।

तब पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्री फवाद चौधरी ने कहा था, ''दूसरों के मुकाबले पाकिस्तान का रक्षा बजट पहले ही कम है। ऐसे में इसे बढ़ाने की जरूरत है न कि घटाने की। हमें अपना सुरक्षातंत्र मजबूत करने के लिए डिफेंस बजट बढ़ाने जरूरत है। लेकिन इसके लिए राजस्व को बढ़ाना होगा।''

बीते महीने ही पाकिस्तानी सरकार ने कहा था कि सेना और सिविल संस्थाएं 2019-20 बजट के लिए अपना योगदान देंगी। पाक प्रधानमंत्री के वित्तीय सलाहकार डॉ हफीज शेख ने कहा था, ''आगामी बजट चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। हम सरकार के खर्चों को बेहद कम करने की कोशिश करेंगे।''

कितना है पाकिस्तान का रक्षा बजट?

स्कॉटहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 में पाकिस्तान का कुल सैन्य खर्च 11.4 अरब डॉलर रहा था। ये खर्च पाकिस्तान की कुल जीडीपी के चार फीसदी के बराबर है। 2018 में भारत का सैन्य खर्च करीब 66.5 अरब डॉलर रहा था। इस मामले में 649 अरब डॉलर के साथ अमेरिका पहले पायदान पर है।

कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से छह अरब डॉलर का बेल आउट पैकेज हासिल करने में सफल रहा था। 1980 के बाद पाकिस्तान के लिए आईएमएफ का ये 13वां बेलआउट पैकेज है। यह कर्ज पाकिस्तान को तीन सालों के दौरान मिलेगा। हालांकि इस समझौते पर अभी बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मुहर नहीं लगी है।

पाकिस्तान पर कुल विदेशी कर्ज कितना?

पाकिस्तान और आईएमएफ के बीच बेलआउट पर अक्टूबर 2018 से ही बात चल रही थी। आईएमएफ की वेबसाइट के मुताबिक, पाकिस्तान पर पहले के बेलआउट से ही 5.8 अरब डॉलर का कर्ज है।

2018 की ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान पर 91.8 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज है। छह साल पहले जब नवाज शरीफ ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी तब से इसमें 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

पाकिस्तान पर कर्ज और उसकी जीडीपी का अनुपात 70 फीसदी तक पहुंच गया है। कई विश्लेषकों का कहना है कि चीन का दो तिहाई कर्ज सात फीसदी के उच्च ब्याज दर पर हैं।

कोई विदेशी निवेश नहीं

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की सबसे जटिल समस्या यह है कि कोई विदेशी निवेश नहीं आ रहा है। पाकिस्तान में वित्तीय वर्ष 2018 में महज 2.67 अरब डॉलर का निवेश आया था, जबकि चालू खाता घाटा 18 अरब डॉलर का रहा।

आईएमएफ ने कहा है कि अगले वित्तीय वर्ष में पाकिस्तान में महंगाई दर 14 फीसदी तक पहुंच सकती है। आईएमएफ से कर्ज लेने के बाद इमरान खान की सरकार के लिए लोकलुभावन वादों से पीछे हटना होगा।

समस्या यह है कि लगातार कम होते विदेशी मुद्रा भंडार के कारण पाकिस्तान को पास कोई विकल्प नहीं था। चुनावी अभियान के दौरान इमरान खान कहते थे कि वो खुदकुशी करना पसंद करेंगे, लेकिन दुनिया के किसी भी देश से पैसे मांगने नहीं जाएंगे।

लेकिन इमरान खान जब पहले विदेशी दौरे पर सऊदी पहुंचे तो उन्होंने आर्थिक मदद ही मांगी। पिछले महीने ही सरकार ने कहा था कि पिछले पांच सालों में पाकिस्तान पर कर्ज 60 अरब डॉलर से बढ़कर 95 अरब डॉलर हो गया है। पाकिस्तान पर कर्ज और उसकी जीडीपी का अनुपात 70 फीसदी तक पहुंच गया है।

द सेंटर फोर ग्लोबल डिवेलपमेंट की रिपोर्ट के अनुसार चीनी कर्ज का सबसे ज्यादा खतरा पाकिस्तान पर है। चीन का पाकिस्तान में वर्तमान परियोजना 62 अरब डॉलर का है और चीन का इसमें 80 फीसदी हिस्सा है।

चीन ने पाकिस्तान को उच्च ब्याज दर पर कर्ज दिया है। इससे डर को और बल मिलता है कि पाकिस्तान पर आने वाले वक़्त में चीनी कर्ज का बोझ और बढ़ेगा।

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