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पाकिस्तान को तगड़ा झटका, करोड़ों डॉलर खर्च कर खोदा समंदर मिला कुछ नहीं

बीबीसी Updated Sun, 19 May 2019 07:14 PM IST
पाकिस्तान की जर्जर अर्थव्यवस्था
पाकिस्तान की जर्जर अर्थव्यवस्था - फोटो : Social Media
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पाकिस्तान ने जब कराची के पास तटीय इलाके में तेल और गैस की खोज शुरू की थी तब बड़ा भंडार मिलने की उम्मीद जाहिर की गई थी। लेकिन शनिवार को पाकिस्तान ने अधिकारिक रूप से इस क्षेत्र में तेल और गैस की खोज के प्रयास रोक दिए हैं। इससे अपनी ईंधन जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर रहने वाले पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है।
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शनिवार को पाकिस्तान ने अधिकारिक तौर पर केकरा-1 सेक्टर में ऑफशोर ड्रिलिंग (तट से दूर खुदाई) बंद करने की घोषणा की। समाचार एजेंसी एपीपी के मुताबिक तेल के कुएं की खोज कर रहा दल अगले कुछ दिनों में इस कुएं को बंद कर देगा।

इससे पहले पाकिस्तान इस क्षेत्र में तेल की खोज के 17 प्रयास कर चुका है लेकिन सभी नाकाम रहे हैं। केकरा-1 तेल कुआं कराची के तट से 280 किलोमीटर दूर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। ये इंडस-जी ब्लॉक में आता है।

प्रधानमंत्री इमरान खान के विशेष सहायक नदीम बाबर ने स्थानीय मीडिया से बात करते हुए कहा कि केकरा-1 में तेल की खोज के परिणाम इच्छानुसार नहीं रहे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने इसी साल मार्च में कहा था कि पाकिस्तान को अरब सागर में तेल का बड़ा भंडार मिल सकता है।

उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान तेल और गैस की बड़ी खोज करने के करीब पहुंच गया है और अगर ऐसा हुआ तो देश की आर्थिक समस्याएं खत्म हो जाएंगी।

मार्च में इमरान खान ने कहा था, "मैं दुआ करता हूं और हम सभी दुआ करें कि पाकिस्तान को ये प्राकृतिक संसाधन बड़ी मात्रा मे मिले। एक्सनमोबिल के नेतृत्व के कॉन्सॉर्टियम की समुद्र में तट से दूर की जा रही ड्रिलिंग से हमारी उम्मीदें सच साबित हों।"

इमरान खान ने कहा था, "इसकी प्रबल संभावना है कि हम अपने पानी में बहुत बड़ा भंडार खोज लेंगे। अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान फिर अलग ही लीग में आ जाएगा।"

पाकिस्तान के इस जलक्षेत्र में अमेरिकी तेल कंपनी एक्सनमोबिल और इटली की ईएनआई तेल की खोज में साझा खुदाई कर रही हैं। इन कंपनियों ने तेल की खोज में समुद्र तल में गहरा कुआं खोदा है।

पाकिस्तान के पेट्रोलियम रिजर्व के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक 5500 मीटर तक खुदाई करने के बाद कोई तेल भंडार नहीं मिला है। अब इन कंपनियों ने कुएं को बंद करने का फैसला लिया है।

पाकिस्तान के जल संसाधन मंत्री सैयद अली हैदर ने गल्फ न्यूज से कहा, "हमने तेल की खोज में अभी सिर्फ 18 कुएं ही खोदे हैं। भारत को 43वां कुआं खोदने के बाद कामयाबी मिली थी। लीबिया को 58वें प्रयास में तेल मिला था। नॉर्वे ऐसा देश है जहां तेल मिलने की उम्मीद किसी को नहीं थी, पर उसने 1954 और 63 के बीच में 78 कुएं खोदे और बड़ी कामयाबी मिली।"

इस खोज अभियान पर करीब दस करोड़ डॉलर खर्च किए जा चुके हैं। अखबार डॉन के मुताबिक पेट्रोलियम डिवीजन के अधिकारियों का कहना है कि खोज अभियान से इकट्ठा किए गए डेटा का इस्तेमाल भविष्य के खोज अभियानों में किया जा सकेगा।

अधिकारियों का कहना है कि इस खुदाई के दौरान भूकंप से जुड़े शोध भी किए गए हैं जो मददगार साबित होंगे। समुद्र में तेल खोजना एक बेहद जटिल और मुश्किल भरा काम है। इस क्षेत्र में निवेश जोखिम भरा होता है। भारत को अपने चर्चित तेल कुएं बॉम्बे हाई से 40 से अधिक प्रयासों के बाद तेल मिला था।

पाकिस्तान के केकरा-1 क्षेत्र में इटली की कंपनी ईएनआई ने जनवरी में तेल की खोज में खुदाई शुरू की थी। इसके अलावा अमेरिका का प्रमुख कंपनी एक्सनमोबिल, पाकिस्तान की गैस कंपनियां पाकिस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड और ऑयल एंड गैस डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (ओजीडीसीएल) इसमें साझेदार हैं।

अधिकारियों का कहना है कि पहले एकत्रित किए गए डेटा के आधार पर यहां तेल मिलने की उम्मीदें बहुत ज्यादा थीं और खुदाई जब शुरू की गई थी तब कामयाबी की संभावना 13-15 फीसद तक थी। किसी क्षेत्र में तेल या गैस मिलने की अधिकतम संभावना 20 फीसदी ही होती है।

ये पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान में तेल या गैस खोजने की कोशिशें हुई हैं। पाकिस्तान के जलक्षेत्र में सबसे पहला कुआं अमेरिकी कंपनी ने साल 1963 में खोदा था। ये कुआं सूखा निकला था। पाकिस्तान में आखिरी बार जलक्षेत्र में तेल की खोज की कोशिश 2005 में की गई थी। नीदरलैंड्स की कंपनी शेल ने 2005 में कुआं खोदा था लेकिन इसमें भी कोई हाइड्रोकार्बन भंडार नहीं मिला था।

अब एक बार फिर पाकिस्तान को तेल की खोज में नाकामी मिली है। इसे प्रधानमंत्री इमरान खान के लिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है। उन्हें इस कुएं से बहुत उम्मीदें थीं और वो पहले ही इसकी कामयाबी का जश्न तक मना चुके थे।

इमरान खान ने कहा था, "अल्लाह ने चाहा तो ये भंडार इतना बड़ा होगा कि पाकिस्तान को तेल खरीदने की जरूरत नहीं पडे़गी।" इमरान खान ने बीते साल अगस्त में सत्ता संभाली थी। सत्ता संभलने के बाद से ही उनके सामने बेहद मुश्किल आर्थिक हालात हैं।

बीते कुछ दिनों में पाकिस्तान के रुपए में भारी गिरावट हुई है और इसे एशिया की सबसे कमजोर मुद्रा तक कहा जाने लगा है। शनिवार को पाकिस्तान का रुपया टूटकर 150 रुपए प्रति डॉलर तक पहुंच गया था।

पाकिस्तान की सरकार ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से छह अरब डॉलर का लोन लेने पर सहमति दी थी। इस फैसले के बाद से ही रुपया लगातार टूट रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान के रुपए में ये टूट जारी रहेगी और सबसे खराब समय अभी आना बाकी है।

पाकिस्तान अपनी ईंधन जरूरतों के लिए भी तेल आयात पर ही निर्भर है। फिलहाल पाकिस्तान अपनी जरूरतों का 85 फीसदी तेल बाहर से खरीदता है और स्वंय 15 फीसदी कच्चा तेल ही पैदा करता है। पाकिस्तान को अपने विदेशी मुद्रा भंडार का बड़ा हिस्सा तेल खरीदने पर ही खर्च करना पड़ता है।

पाकिस्तान के आर्थिक हालात कितने खराब है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस समय पाकिस्तान का चालू खाता घाटा 18 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।

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