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Nobel Peace Prize: इस शख्स और इन दो संगठनों ने जीता इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार, इनके बारे में जानिए सबकुछ

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Amit Mandal Updated Fri, 07 Oct 2022 04:20 PM IST
सार

बियालियात्स्की ने 1980 में बेलारूस की तानाशाही के खिलाफ डेमोक्रेसी मूवमेंट का आगाज किया था। वो आज तक अपने ही देश में सच्चा लोकतंत्र बहाल करने की जंग लड़ रहे हैं।

Ales Bialiatski
Ales Bialiatski - फोटो : social media
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विस्तार

इस साल नोबेल शांति पुरस्कार 2022 एक व्यक्ति और दो संगठनों को दिया गया है। बेलारूस के ह्यूमन राइट्स वकील एलेस बियालियात्स्की को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए चुना गया है। नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में इस पुरस्कार का एलान किया गया। एलेस बियालियात्स्की के अलावा रशियन ह्यमून राइट्स ऑर्गनाइजेशन मेमोरियल और यूक्रेनियन ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन सेंटर फॉर सिविल लिबर्टीज को ये पुरस्कार मिला है। ये दोनों संस्थान मानवाधिकार के लिए काम करते हैं।



कौन हैं आलिस बियालियात्स्की
बियालियात्स्की ने 1980 में बेलारूस की तानाशाही के खिलाफ डेमोक्रेसी मूवमेंट का आगाज किया था। वो आज तक अपने ही देश में सच्चा लोकतंत्र बहाल करने की जंग लड़ रहे हैं। रूस-यूक्रेन जंग में बेलारूस के राष्ट्रपति लुकाशेंको व्लादिमीर पुतिन के साथ खड़े हैं और सख्त तानाशाह माने जाते हैं। बियालियात्स्की ने विसाना नाम का संगठन तैयार किया है। यह संगठन जेल में बंद लोकतंत्र समर्थकों को कानूनी मदद मुहैया कराता है। 2011 से 2014 तक बियालियात्स्की जेल में रहे। 2020 में उन्हें फिर गिरफ्तार कर लिया गया और अब तक जेल में हैं। 


14 जुलाई, 2021 से वह कथित कर चोरी के आरोप में जेल में बंद है। मानवाधिकार रक्षक इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित मानते हैं। बियालियात्स्की बेलारूसी साहित्य के विद्वान हैं और उन्होंने 1984 में होमील स्टेट यूनिवर्सिटी से रूसी और बेलारूसी भाषाशास्त्र में डिग्री के साथ स्नातक की उपाधि प्राप्त की। अपने छात्र दिनों के दौरान बियालियात्स्की कई लोगों से मिले, जो बाद में प्रसिद्ध लेखक बन गए, जिनमें अनातोल सिस, एडुआर्ड अकुलिन, सियारज़ुक सिस और अनातोल काज़लौ शामिल थे।

स्नातक स्तर की पढ़ाई के बाद बियालियात्स्की ने लिजीसी जिला, होमिएन क्षेत्र में एक स्कूली शिक्षक के रूप में काम किया। 1985-1986 में उन्होंने येकातेरिनबर्ग (तब सेवरडलोव्स्क), रूस के पास एक एंटीटैंक आर्टिलरी बैटरी में एक बख्तरबंद वाहन चालक के रूप में सेना में नौकरी की।

इन दो संगठनों को मिला शांति पुरस्कार 
रूस का ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन मेमोरियल 1987 में सोवियत संघ के दौर में बना था। इसके फाउंडर मेंबर्स में नोबेल पीस प्राइज विजेता एंद्रेई सखारोव और ह्यूमन राइट्स वकील स्वेतलाना गनुशकिना भी थे। 90 के दशक में सोवियत संघ के 15 हिस्सों में बिखरने के बाद यह रूस का सबसे बड़ा मानवाधिकार संगठन बना। इसने स्टालिन के दौर से अब तक राजनैतिक कैदियों के लिए आवाज उठाई। रूस ने जब चेचेन्या पर हमला किया और 2009 में इस संगठन की नतालिया एस्तेमिरोवा मारी गईं तो इस संगठन ने विश्व स्तर पर आवाज उठाई और चर्चा में रही। रूसी सरकार इसे विदेशी जासूसों का संगठन बताती है।

सेंटर फॉर सिविल लिबर्टीज का गठन यूक्रेन की राजधानी कीव में 2007 में हुआ था। इसका मकसद यूक्रेन में लोकतंत्र को मजबूत करना था। इस संगठन का कहना है कि यूक्रेन में अब भी सही मायनों में लोकतंत्र मौजूद नहीं है। इस संगठन की मांग है कि यूक्रेन को इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट का हिस्सा बनना चाहिए। इसी साल फरवरी में जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो इस संगठन ने वॉर क्राइम के मामलों की जांच की। अब यह मामले इंटरनेशनल कोर्ट में दायर किए जा रहे हैं। 
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बता दें कि नोबेल वीक तीन अक्टूबर को शुरू हुआ था और 10 अक्टूबर तक चलेगा। सात दिन में कुल छह पुरस्कारों की घोषणी होती है। सबसे आखिर में आर्थिक श्रेणी में नोबेल पुरस्कार का एलान किया जाता है। इस सप्ताह सिर्फ पुरस्कार जीतने वाले व्यक्ति या संस्थान के नामों का ऐलान होगा। दिसंबर में इन्हें पुरस्कार दिए जाएंगे। कोविड-19 की वजह से 2020-21 के विजेता स्टॉकहोम नहीं पहुंच पाए थे। कमेटी ने इस बार इन दो साल के विजेताओं को भी स्टॉकहोम में आमंत्रित किया है। 

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