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Nepal Politics: नेपाल में नई सरकार बनाने की गतिविधियों के बीच यूएमएल की ‘खामोश रणनीति’

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 03 Dec 2022 04:28 PM IST
सार

Nepal Politics: पर्यवेक्षकों के मुताबिक यूएमएल पूरे नतीजे सामने आने का इंतजार कर रही है। अभी आनुपातिक प्रतिनिधित्व वाली सीटों का आवंटन नहीं हुआ है। इस आवंटन के बाद अगर सत्ताधारी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है, तब यूएमएल अपने पत्ते खोलेगी...

Nepal Politics: शेर बहादुर देउबा और केपी शर्मा ओली
Nepal Politics: शेर बहादुर देउबा और केपी शर्मा ओली - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार

नेपाल में नई सरकार बनाने की ज्यादातर गतिविधियां नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन के अंदर चल रही हैं। इस बीच पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) चुप है। लेकिन पर्यवेक्षकों का मानना है कि पार्टी भीतर ही भीतर अपने दांव तैयार कर रही है। 20 नवंबर को हुए आम चुनाव में यूएमएल नेपाली कांग्रेस के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है।

इस हफ्ते कई यूएमएल नेताओं ने संकेत दिया कि पार्टी सही समय पर पहल करेगी। पार्टी के उपाध्यक्ष विष्णु पौडेल ने कहा- ‘जब तक यूएमएल पहल नहीं करती, देश और विकास कार्य आगे नहीं बढ़ सकते।’ पार्टी के एक अन्य उपाध्यक्ष सुभाष चंद्र नेमबाग ने कहा कि सरकार बनाने के मुद्दे पर पार्टी में अभी विचार नहीं किया गया है। उन्होंने कहा- ‘जब सभी नेता काठमांडू लौट कर आएंगे, तब हम विचार-विमर्श करेंगे। जनता ने अपना फैसला सुना दिया है। लोगों की इच्छा पूरी करने में हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।’

पर्यवेक्षकों के मुताबिक यूएमएल पूरे नतीजे सामने आने का इंतजार कर रही है। अभी आनुपातिक प्रतिनिधित्व वाली सीटों का आवंटन नहीं हुआ है। इस आवंटन के बाद अगर सत्ताधारी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है, तब यूएमएल अपने पत्ते खोलेगी।

पार्टी के प्रचार विभाग के उप प्रमुख विष्णु रिजाल ने अखबार काठमांडू पोस्ट से बातचीत में कहा- ‘अगर किसी को बहुमत नहीं मिला, तब हम अन्य दलों के साथ राय-मशविरा करेंगे। लेकिन इस सिलसिले में हम सबसे पहले नेपाली कांग्रेस के दरवाजे पर नहीं जाएंगे। अगर मजबूत सरकार बनने की और कोई संभावना नहीं बनी और नेपाली कांग्रेस ने हमसे संपर्क किया, तो हम उसका स्वागत करेंगे।’

विश्लेषकों का मानना है कि यूएमएल के लिए ऐसा गठबंधन तैयार करना आसान नहीं है, जिसका प्रतिनिधि सभा (संसद के निचले सदन) में बहुमत हो। इसके बावजूद इस बात की संभावना कम है कि यूएमएल चुपचाप बैठी रहेगी। राजनीतिक विश्लेषक झलक सुबेदी ने कहा है कि फिलहाल यूएमएल नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन की गतिविधियों पर नजर रखे हुए है। अगर वहां गठबंधन सहयोगियों के बीच मतभेद खड़े हुए, तब बनने वाली नई स्थिति का वह फायदा उठाएगी।

प्रतिनिधि सभा की प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली सीटों में से नेपाली कांग्रेस को 54 और यूएमए को 44 सीटें मिली हैं। सत्ताधारी गठबंधन में शामिल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) को 17 सीटें मिली हैं। आनुपातिक प्रतिनिधित्व के लिए हुए मतदान में 27.31 फीसदी वोट पाकर यूएमएल सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई है। नेपाली कांग्रेस को 25.88 और माओइस्ट सेंटर को 11.50 फीसदी वोट मिले हैं। प्रतिनिधि सभा में 275 सदस्य हैं, जिनमें से 165 प्रत्यक्ष निर्वाचन और 110 आनुपातिक प्रतिनिधित्व के जरिए चुने जाते हैं।

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राजनीतिक विशेषज्ञों का माना है कि यूएमएल और माओइस्ट सेंटर चाहें, तो मिल कर सरकार बना सकते हैं। लेकिन यह तभी संभव है कि अगर माओइस्ट नेता पुष्प कमल दहल को प्रधानमंत्री पद देने के लिए यूएमएल तैयार हो। बताया जाता है कि यूएमएल के ज्यादातर नेता इसके लिए राजी नहीं हैं।

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