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‘दुनिया भर में फंसे’ हैं प्रवासी और कोविड-19 के कारण हैं खतरे में भी

यूएन हिंदी समाचार Published by: अनिल पांडेय Updated Sun, 10 May 2020 11:59 AM IST
प्रवासियों की भीड़
प्रवासियों की भीड़ - फोटो : यूएन हिंदी समाचार सेवा
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संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी, आईओएम के प्रमुख ने गुरुवार को कहा है कि हजारों प्रवासी "दुनिया भर में" फंसे हुए हैं, और कोविड-19 के संक्रमण के बढ़ते खतरे का सामना कर रहे हैं। आईओएम प्रमुख एंतोनियो विटोरिनो ने नए कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए कुछ देशों द्वारा तथाकथित इम्युनिटी पासपोर्ट जारी करने और मोबाइल फ़ोन ऐप का उपयोग करने के प्रस्तावों का हवाला देते हुए कहा, "स्वास्थ्य ही अब नई संपदा है।"



आईओएम के महानिदेशक ने ये भी चेतावनी दी कि भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी यात्रा प्रतिबंधों के कारण बड़ी संख्या में श्रमिकों के साथ भेदभाव होने की आशंका है। उन्होंने कहा, "दुनिया के बहुत सारे देशों में पहले से ही प्रवासियों के स्वास्थ्य की पहचान करने के लिए जाँच की एक प्रणाली है, मलेरिया, तपेदिक, एचआईवी-एड्स आदि के लिए... और अब मेरा मानना है कि नियमित प्रवासियों के लिए स्वास्थ्य नियंत्रण की मांग और ज्यादा बढ़ जाएगी।" 


एंतोनियो विटोरिनो ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से पत्रकारों से कहा कि पहले से ही यात्रा प्रतिबंधों के जरिए महामारी के प्रसार को सीमित करने की जो कोशिश की गई हैं, उसके कारण लोग पहले से कहीं अधिक कमजोर पड़ गए हैं और जीवनयापन के लिए मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, "दुनिया भर में हजारों प्रवासी फंसे हुए हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया में, पूर्वी अफ्रीका में, लैटिन अमेरिका में, सीमाओं के बंद होने और यात्रा प्रतिबंधों के कारण - बहुत सारे प्रवासी जो उस समय बाहर थे, और उनमें से कुछ महामारी के कारण वापस लौटना भी चाहते थे।”

सीमाओं पर फंसे

उन्होंने कहा, "कि वो वहां सीमावर्ती क्षेत्रों में बहुत कठिन परिस्थितियों में फंसे हैं - कुछ बड़े समूहों में, कुछ छोटे समूहों में, वो भी स्वास्थ्य सेवाओं और देखभाल से पूरी तरह वंचित परिस्थितियों में।।। हम सरकारों से आग्रह कर रहे हैं कि मानवीय कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मियों को उन तक पहुंचने दिया जाए।”

वेनेजुएला के प्रवासियों की बात करें तो वहां आर्थिक संकट चल रहा था और उसके बीच लगभग 50 लाख प्रवासी थे। आईओएम प्रमुख ने बताया, “हजारों लोग… इक्वाडोर और कोलंबिया जैसे देशों में अपना रोजगार खो चुके हैं और बड़ी संख्या में वेनेजुएला वापस लौट रहे हैं – वो भी बिना किसी स्वास्थ्य जाँच के और वापस आने पर उन्हें एकांतवास में भी नहीं रखा जा रहा है।”

आईओएम ने एक बयान में पश्चिम, मध्य और पूर्वी अफ्रीका में रेगिस्तान में फंसे प्रवासियों की दुर्दशा पर प्रकाश डाला, जिन्हें या तो बिना किसी प्रक्रिया के निर्वासित कर दिया गया, या फिर मानव तस्कर छोड़कर चले गए।

उनकी मदद के लिए एजेंसी की टीमें रेगिस्तान में खोज और बचाव का काम जारी रखे हुए हैं। हर हफ्ते सैकड़ों फंसे प्रवासियों को आश्रय, स्वास्थ्य सेवा और सहायता प्रदान की जा रही है। 

शिविरों में संक्रमण की रोकथाम
प्रवासियों के लिए आईओएम की तत्काल प्राथमिकताओं में ये सुनिश्चित करना भी शामिल है कि उन्हें अपने मेजबान देश में स्वास्थ्य देखभाल और अन्य बुनियादी सामाजिक कल्याण सहायता प्राप्त हों। इस समय संयुक्त राष्ट्र एजेंसी की सबसे बड़ी चिन्ता है - दुनिया भर में मौजूद उसके 1,100 से अधिक शिविरों में नए कोरोनावायरस के संक्रमण को फैलने से रोकना।

इनमें बांग्लादेश का कॉक्सेज बाजार परिसर भी शामिल है, जहाँ म्याँमार के लगभग दस लाख रोहिंग्या शरणार्थी रह रहे हैं, जिनमें से अधिकतर उस उत्पीड़न से बचकर भागे थे, जिसकी तुलना संयुक्त राष्ट्र के पूर्व मानवाधिकार उच्चायुक्त, जायद राआद अल हुसैन ने नस्लीय संहार से की थी।

आईओएम प्रमुख ने कहा कि अब तक संक्रमण के कोई मामले सामने नहीं आए हैं। साथ ही शिविर में रहे रहे सैकड़ों लोगों को रोकथाम के उपायों के बारे में जागरूक बनाया जा रहा है और चिकित्सा क्षमता भी बढ़ा दी गई है।

सामाजिक दूरी 'अकल्पनीय'
एंतोनियो विटोरिनो ने ग्रीस में स्थित शिविरों में प्रवासियों की स्थिति पर कहा कि वहाँ संक्रमण के क़रीब 200 मामलों की पहचान की गई थी - हालाँकि आईओएम उन द्वीपों पर काम नहीं करता है जो तुर्की से पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्रों को पार करने वाले प्रवासियों और शरणार्थियों के घर हैं। 

उन्होंने सामाजिक दूरी बनाने के उपाय को "नामुमकिन" बताते हुए कहा कि यहाँ "पानी और स्वच्छता की उपलब्धता काफ़ी बड़ी चुनौती है।" एंतोनियो विटोरिनो ने जोर देकर कहा कि कोविड-19 संक्रमण के तत्काल स्वास्थ्य खतरे के अलावा, प्रवासियों को कलंक व पूर्वाग्रहों का सामना भी करना पड़ता है जिससे उन्हें सुरक्षा की आवश्यकता होती है। 

प्रवासी अहम श्रमिक हैं
उन्होंने कहा कि नफ़रत से भरी अभद्र भाषा और भेदभाव व पूर्वाग्रहों वाले कथनों को पनपने देने से कोविड-19 के खिलाफ़ सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया भी कमजोर पड़ती है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन अमेरिका और स्विटजरलैंड जैसे विकसित देशों में स्वास्थ्यकर्मी के रूप में प्रवासी श्रमिकों की एक बड़ी संख्या मौजूद है।

आईओएम प्रमुख ने चेतावनी देते हुए कहा कि 'रोग लाने वाले प्रवासियों' की कहानियों का तानाबाना बुनकर कृषि और सेवा उद्योगों से अहम श्रमिकों को हटाने से सामाजिक उथल-पुथल होगी और देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो जाएगा। साथ ही कोविड संकट खत्म होने के बाद आर्थिक सुधारों पर भी प्रभाव पड़ सकता है। 

घर भेजने के लिए खत्म होता धन
आईओएम के महानिदेशक एंतोनियो विटोरिनो ने विश्व बैंक के आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि महामारी के दौरान विपत्तियों के कारण पहले ही आमदनी में 30 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है, जिससे लगभग 20 अरब डॉलर की रक़म उन देशों में परिवारों तक नहीं भेजी जा सकी, जहाँ उनके सकल घरेलू उत्पाद का 15 प्रतिशत भाग विदेशों के इन्हीं भुगतानों से आता था। 

एंतोनियो विटोरिनो ने सभी देशों से अपने नागरिकों की तरह प्रवासियों के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने का आग्रह करते हुए कहा कि जो सरकारें उनकी निगरानी नहीं करेंगी, वो लॉकडाउन जैसे उपाय फिर से अपनाने के लिए मजबूर हो सकती हैं। 

आईओएम प्रमुख ने कहा, "ये बिल्कुल स्पष्ट है कि स्वास्थ्य ही नई सम्पदा है और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को यातायात प्रणालियों में शामिल किया जाएगा - न केवल प्रवास के लिए - बल्कि पूर्ण रूप में; जिसमें व्यवसाय या पेशेवर कारणों से यात्रा करने पर, पासा पलटने की क्षमता स्वास्थ्य में होगी।”

“अगर महामारी दो या तीन स्तरीय गतिशीलता प्रणाली की ओर ले जाती है, तो हमें इस समस्या को सुलझाने की कोशिश करनी होगी - महामारी की समस्या - लेकिन साथ ही हमने असमानताएँ गहरी करके एक और नई समस्या पैदा कर ली है।"

आईओएम के काम का एक मुख्य भाग है – कठिन परिस्थितों में फंसे प्रवासियों को स्वैच्छिक रूप से वापस लाना, जिसमें महामारी से प्रभावित लोग भी शामिल हैं। ऐसा करने के लिए, एजेंसी वित्तीय मदद की तलाश करती रहती है और सरकारों के साथ साझेदारी में काम करके सहायता की मांग करती है।

आईओएम प्रमुख ने कहा, "हमारे पास इस क्षेत्र के अनेक देशों ने गुहार लगाई है कि हम उनके प्रवासियों को उनके मूल देशों में वापस लाने में मदद करें, फिर चाहे वो मोजाम्बीक हो, या मलावी, जिम्बाब्वे, या फिर नाइजीरिया। जैसा कि आप जानते हैं, आईओएम प्रोजेक्ट पर काम करता है, इसलिए हमारे पास इन देशों को अपने नागरिकों को वापस लाने में मदद करने की वित्तीय क्षमता नहीं है, जब तक कि ऐसा करने के लिए धन उपलब्ध न हो।"

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