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नीरव की वकील ने कहा, भारत में उसे दोषी सिद्ध करने की 'राजनीतिक जरूरत' पैदा हो गई है

पीटीआई, लंदन Published by: गौरव पाण्डेय Updated Tue, 08 Sep 2020 09:19 PM IST
नीरव मोदी
नीरव मोदी - फोटो : एएनआई (फाइल)
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भारत प्रत्यर्पित किए जाने के खिलाफ ब्रिटेन में कानूनी लड़ाई लड़ रहे नीरव मोदी के वकीलों ने मंगलवार को अदालत से कहा कि मोदी के विरुद्ध भारत में निष्पक्ष मुकदमा चलने की संभावना नहीं है। मोदी के वकील ने कहा कि उसे भारतीय जेलों में पर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं के अभाव के चलते आत्महत्या का भी खतरा है।



पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) से करीब दो अरब डॉलर की धोखाधड़ी और धनशोधन के मामले में भगोड़ा हीरा कारोबारी नीरव (49) लंदन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत में प्रत्यर्पण का मुकदमा लड़ रहा है।



'भारत में नीरव को दोषी सिद्ध करने की राजनीतिक जरूरत'
मोंटगोमरी ने अदालत से कहा, 'भारत में न्याय प्रणाली की सत्यनिष्ठा का काफी ह्रास हुआ है और नीरव मोदी का मामला एक राजनीतिक मुद्दा बन गया है। उन्होंने दावा किया कि चूंकि मोदी को भारत में नफरत से देखा जा रहा है, इसलिए उसकी निंदा करने और उसे दोषी साबित होते देखने की 'राजनीतिक जरूरत' पैदा हो गई है।

उन्होंने कहा कि बचाव पक्ष के अन्य गवाहों ने भी जांच एजेंसियों, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रर्वतन निदेशालय (ईडी) के ‘व्यवहार के मानदंड’ में गिरावट आने का भी जिक्र किया है। अदालत को लंदन की वेंड्सवर्थ जेल में नीरव के मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट होने के बारे में भी जानकारी दी गई।

मोंटगोमरी ने कहा, 'उसमें (नीरव) अवसाद बढ़ता जा रहा है और ताजा आकलन से यह जाहिर हुआ है कि यदि उसका उपयुक्त उपचार नहीं किया गया तो उसे अस्पताल में भर्ती करना पड़ेगा।' उन्होंने कहा कि यहां या वहां, उसके आत्महत्या करने का खतरा है।

अदालत ने भारतीय जेलों के आंकड़ों पर गौर किया
अदालत में नीरव की पांच दिनों की प्रत्यर्पण सुनवाई के दूसरे दिन न्यायमूर्ति सैमुअल गूज ने भारतीय जेलों के आधिकारिक आंकड़ों पर गौर किया। इनमें मुंबई की आर्थर रोड जेल में सामने आए कोविड-19 महामारी के मामले भी शामिल हैं। भारत प्रत्यर्पित किए जाने पर नीरव मोदी को इसी जेल में रखा जाएगा।

नीरव की वकील क्लेर मोंटगोमरी ने सप्ताह में आगे की सुनवाई के दौरान विशेषज्ञों के बयान दिलाने की अपनी योजना से भी अदालत को अवगत कराया। इनमें भारतीय उच्चतम न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश भी शामिल हैं, जिनके सिर्फ अंतिम नाम काटजू का उल्लेख किया गया है।

'भारत की जेलों में मनोचिकित्सीय मदद का अभाव'
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जेलों में मनोचिकित्सीय मदद का भी घोर अभाव है। उन्होंने कहा, '...उसकी मानसिक दशा और कोविड-19 के खतरे को देखते हुए उसे मानवीय परिस्थितियों में रखने का आश्वासन (भारत सरकार का) और जेल वीडियो पूरी तरह से अपर्याप्त प्रतीत होता है।'

सोमवार को अदालत ने ऑर्थर रोड जेल के एक नए वीडियो की समीक्षा की थी। बैरिस्टर हेलेन मैल्कम ने अदालत को बताया कि वीडियो से साबित होता है कि जेल की स्थितियों में मानवाधिकार संबंधी यूरोपीय संधि के तहत ब्रिटेन के दायित्वों के उल्लंघन का कोई खतरा नहीं है।

नीरव की कानूनी टीम ने आर्थर रोड जेल में मई में कोविड-19 के प्रसार को काबू कर लिए जाने के भारत सरकार के दावों का जवाब देने की कोशिश के तहत एक विशेषज्ञ की गवाही दिलाने की योजना का भी संकेत दिया है। नीरव को पिछले साल प्रत्यर्पण वारंट पर एक  गिरफ्तार किया गया था।

नीरव दो मामलों में आपराधिक कार्यवाही का सामना कर रहा है, एक मामला पीएनबी से की गई धोखाधड़ी को लेकर सीबीआई का है, जबकि दूसरा मामला उस रकम के धन शोधन को लेकर ईडी का है। प्रत्यर्पण के मामले में इस साल के अंत में फैसला आने की उम्मीद है। अंतिम सुनवाई एक दिसंबर से हो सकती है।

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