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Report: क्रिप्टोकरेंसी को लेकर लोगों की दीवानगी के साथ बढ़ रहे घोटाले, अमेरिकी एजेंसी ने किया आंख खोलने वाला खुलासा

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 05 Feb 2022 11:02 AM IST
सार

Scams In Cryptocurrency: एफटीसी की रिपोर्ट में ऐसे घोटालों में फेसबुक और इंस्टाग्राम की भूमिका का खास जिक्र किया गया है। जो मामले सामने आए, उनमें एक तिहाई लोग इन्हीं दोनों प्लेटफॉर्म्स पर घोटालेबाजों के संपर्क में आए थे। ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़े घोटालों में तो इन दोनों प्लेटफॉर्म्स का हिस्सा 90 फीसदी रहा।

क्रिप्टोकरेंसी में घोटालेबाजी
क्रिप्टोकरेंसी में घोटालेबाजी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

क्रिप्टोकरेंसी में फर्जी नाम से निवेश के जरिए हुए बड़े वित्तीय घोटालों ने विकसित देशों की भी चिंताएं बढ़ा दी हैं। अमेरिका में इस हफ्ते इस सिलसिले में जारी एक रिपोर्ट ने इस फैल रही समस्या की तरफ दुनिया का ध्यान खींचा। अमेरिका सरकार की एजेंसी- फेडरल ट्रेड कमीशन (एफटीसी) ने ऐसी शिकायतों की जांच की। उसके बाद उसने अपनी रिपोर्ट जारी की, जो लगातार चर्चा में है।



रिपोर्ट में सरकारों को किया आगाह
पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि क्रिप्टोकरेंसियों की लोकप्रियता दुनिया भर में बढ़ रही है। इसलिए अब इसके जरिए घोटाले भी ज्यादा होने लगे हैं। इसे देखते हुए अब ऐसी स्थिति बन गई है, जब सरकारें इस मसले से आंख नहीं चुरा सकतीं। समस्या इसलिए अधिक पेचीदा हो है, क्योंकि क्रिप्टोकरेंसियों का किन-किन प्रकारों से उपयोग किया जा रहा है, इस बारे में अभी तक पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि सोशल मीडिया और क्रिप्टोकरेंसी के चलन ने घोटालेबाजों का काम आसान बना दिया है। इसलिए अब यह सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे ऐसी धोखाधड़ी के प्रति लोगों को जागरूक करने और इनसे उन्हें बचाने के उपाय करेँ।


युवा बन रहे सबसे ज्यादा शिकार
एफटीसी की रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे घोटालों का शिकार ज्यादातर नौजवान बने हैं। आम तौर पर नौजवान तकनीकी रूप से काबिल होते हैं, लेकिन वित्तीय मामलों की उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं होती। यही वजह है कि 18 से 39 साल तक उम्र वाले लोगों के ऐसे घोटालों का शिकार बनने की संभावना इससे अधिक उम्र वाले लोगों की तुलना में दो गुना पाई गई है। एफटीसी ने बताया कि कुल जितने नुकसान की सूचना उसे मिली, उसमें 37 फीसदी संख्या उन मामलों की थी, जिनमें सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया गया था।

सोशल मीडिया बना बड़ा हथियार
रिपोर्ट में कहा गया है- ‘लोग धन भेजते हैं और इसके लिए अकसर वे क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है।’एफटीसी की जांच के दौरान सामने आया कि जिन मामलों में निवेश घोटाला सोशल मीडिया पर नहीं हुआ था, उनमें भी बहुत से मामले ऐसे थे, जिनकी शुरुआत सोशल मीडिया से हुई। एफटीसी की रिपोर्ट में ऐसे घोटालों में फेसबुक और इंस्टाग्राम की भूमिका का खास जिक्र किया गया है। जो मामले सामने आए, उनमें एक तिहाई लोग इन्हीं दोनों प्लेटफॉर्म्स पर घोटालेबाजों के संपर्क में आए थे। ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़े घोटालों में तो इन दोनों प्लेटफॉर्म्स का हिस्सा 90 फीसदी रहा।

फर्जी साइटों के जरिए धोखाधड़ी
एक ऐसा मामला सामने आया जिसमें एक व्यक्ति ने क्रिप्टोकरेंसी से खूब पैसा कमाने का बखान करते हुए दूसरे लोगों को फर्जी निवेश साइटों पर जाने के लिए प्रेरित किया। रिपोर्ट के मुताबिक लोगों ने सबसे ज्यादा पैसा ऑनलाइन शॉपिंग के सिलसिले में हुई धोखाधड़ी के दौरान गंवाया। न्यूज वेबसाइट एक्सियोस.कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2017 के बाद से अमेरिका में धोखाधड़ी के कुल सामने आए मामलों में सोशल मीडिया पर धोखा खाने के मामलों का हिस्सा 25 के करीब है। 2021 में अमेरिका में 95 हजार से ज्यादा लोगों ने सोशल मीडिया पर धोखाधड़ी का शिकार बनने की शिकायत दर्ज कराई। इन मामलों में 77 करोड़ डॉलर का चूना लगाया गया था।

स्मैकर्स लगा रहे निवेशकों को चूना
ब्लॉकचैन विश्लेषण फर्म चेन एनालिसिस के अनुसार, साल 2021 में स्मैकर्स ने निवेशकों को 7.7 अरब डॉलर का चूना लगाया। इनमें से करीब 1.1 अरब डॉलर एक ही योजना के लिए जिम्मेदार था, जो कथित तौर पर रूस और यूक्रेन में केंद्रित थी। रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में बढ़ते क्रिप्टोकरेंसी घोटालों का एक प्रमुख स्रोत 'रग पुल' था, जहां एक नई क्रिप्टोकरेंसी के डेवलपर्स गायब हो जाते हैं और निवेशकों के फंड को अपने साथ ले जाते हैं। रग पुल का 2021 में सभी क्रिप्टोकरेंसी घोटाले के राजस्व का 37 प्रतिशत 2.8 अरब डॉलर था।  जो पिछले साल की तुलना में नुकसान में 81 प्रतिशत की वृद्धि है।
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घोटालों की संख्या बढ़कर 3300 हुई
चेन एनालिसिस की रिपोर्ट में पाया गया कि साल 2021 में क्रिप्टोकरेंसी के बाजार में सक्रिय वित्तीय घोटालों की संख्या 2020 के 2,052 के आंकड़े से बढ़कर 3,300 हो गई है। दुनिया की लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी इथेरियम और बिटकॉइन के मूल्य में वृद्धि के साथ इनमें निवेश करने वाले निवेशकों के साथ घोटाले होने की वारदातों में भी इजाफा हुआ है।  रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि इन घोटालों पर लगाम लगाने का सबसे महत्वपूर्ण उपाय कोड ऑडिट है। कोड ऑडिट एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से एक तृतीय-पक्ष एक नए टोकन या अन्य डेफी परियोजना के पीछे स्मार्ट अनुबंध के कोड का विश्लेषण करता है।

क्रिप्टो मनी लॉन्ड्रिंग में 30 फीसदी इजाफा
हाल ही में जारी की गई एक रिपोर्ट की मानें तो बीते साल 2021 में क्रिप्टोकरेंसी के प्रति लोगों की लोकप्रियता में तेज इजाफा देखने को मिला है। भारत में भी क्रिप्टो निवेशकों की संख्या में अच्छी खासी बढ़ोतरी हुई। इस बीच क्रिप्टोकरेंसी में मनी लॉन्ड्रिंग के मामले भी उसी रफ्तार से बढ़े हैं। ब्लॉकचेन एनालिसिस फर्म के अनुसार, बीते साल 8.6 अरब डॉलर से ज्यादा की क्रिप्टो मनी लॉन्ड्रिंग हुई, जो कि साल 2020 की तुलना में 30 फीसदी अधिक है। बता दें कि मनी लॉन्ड्रिंग का मतलब उस प्रक्रिया से है जिसमें अवैध रूप से कमाए गए धन को कानूनी व्यापार में स्थानांतरित कर दिया जाता है। अनुमान है कि 2017 से अभी तक साइबर अपराधी कुल 33 अरब डॉलर की क्रिप्टो की लॉन्डरिंग कर चुके हैं।

दिसंबर में 9.3 अरब डॉलर निवेश 
एक पूर्व रिपोर्ट के अनुसार, साल 2021 क्रिप्टो बाजार के लिए बेहद फायदेमंद साबित हुआ है। इसमें कहा गया कि पिछले साल दिसंबर तक क्रिप्टोकरेंसी में 9.3 अरब डॉलर का निवेश हुआ है। बता दें कि साल 2020 की तुलना में 2021 के दौरान इनफ्लो में 36 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। कॉइनशेयर के इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटिजिस्ट जेम्स बटरफिल के अनुसार, इसमें एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) 2021 में 62.5 मिलियन डॉलर पर रही, जो 2019 के अंत में सिर्फ 2.8 बिलियन डॉलर रही थी। रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले साल के आखिरी सप्ताह यानी दिसंबर 2021 के आखिरी हफ्ते में इस क्षेत्र से कुल 3.2 करोड़ डॉलर का निवेश हुआ। 

भारत में भी क्रिप्टो निवेशकों की तादाद बढ़ी
गौरतलब है कि भारत में भी क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। एक पूर्व रिपोर्ट की मानें तो देश में संचालित विभिन्न क्रिप्टो एक्सचेंज में करीब 1.5 करोड़ भारतीयों ने रजिस्ट्रेशन कराए हुए हैं। वहीं हालिया रिपोर्ट की मानें तो देश में 10.5 करोड़ क्रिप्टो निवेशक है, जो किसी दूसरे देश की तुलना में सबसे ज्यादा हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया कि 2030 तक यह आंकड़ा और भी बढ़ जाएगा। हालांकि, भारत में भी क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित धोखाधड़ी के कई मामले मिल चुके हैं, जिनकी जांच की जा रही है।  
 

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