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कई प्रधानमंत्रियों को बर्खास्त करने वाला पाक राष्ट्रपति जिसके पूर्वज ने हिंदुस्तान से की थी गद्दारी

न्यूज डेस्क, नई दिल्ली Published by: अनिल पांडेय Updated Mon, 14 Jun 2021 04:23 PM IST

सार

इस्कंदर मिर्जा कौन था, कैसे वह पाकिस्तान का गवर्नर जनरल और राष्ट्रपति बना। क्यों उसने एक के बाद एक पांच प्रधानमंत्रियों से इस्तीफे लिए। ऐसा क्या हुआ कि उसके अपने पसंदीदा व्यक्ति ने ही उसे देश से निष्कासित कर दिया और मौत के बाद दफन के लिए कब्र तक नसीब नहीं होने दी। यह सब जानकारी आपको हमारी इस खबर में मिलेगी।
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इस्कंदर मिर्जा
इस्कंदर मिर्जा - फोटो : Pakistan Website
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विस्तार

भारत और पाकिस्तान को आजाद होकर देश बने हुए 74 साल हो गए हैं। इन सात दशकों में हमारे पड़ोसी मुल्क ने 27 प्रधानमंत्री देखे हैं। पाकिस्तान में प्रधानमत्रियों, गवर्नर जनरल और राष्ट्रपति को वहां के सैनिक तानाशाहों द्वारा देश से निकाला या फिर पद से हटाया गया है। कुछ मामलों में वहां की सुप्रीम कोर्ट ने भी इन्हें अयोग्य घोषित किया है। ऐसे ही एक राष्ट्रपति थे इस्कंदर मिर्जा। बंटवारे के बाद मोहम्मद अली जिन्ना ने इस्कंदर मिर्जा को अपना रक्षा सचिव नियुक्त किया था। यहीं से पाकिस्तान में फौजी शासन की नींव पड़ी थी।
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इस्कंदर और मीर जाफर का रिश्ता
इस्कंदर और मीर जाफर का रिश्ता समझने के लिए हमें इतिहास के पन्नों की कुछ धूल को झाड़ना होगा। ये बात है 18वीं शताब्दी की, जब बंगाल में नवाब सिराजुद्दौला का शासन था। अंग्रेज उन्हें हराने के लिए एड़ी-चोटी की जोर आजमाइश कर रहे थे। अंग्रेजी फौज का सेनापति रॉबर्ट क्लाइव जब यह समझ गया कि सिराजुद्दौला को हराना आसान नहीं है तो उसने धोखे का सहारा लिया। उसे पता चला कि नवाब का सेनापति मीर जाफर भ्रष्ट और लालची है।


मीर जाफर के रूप में क्लाइव को बंगाल फतह की जीत की चाबी मिल गई। जाफर अंग्रेजों से मिल गया और 23 जून, 1757 को प्लासी के युद्ध में नवाब को हार का मुंह देखना पड़ा। इस हार ने हिंदुस्तान में अंग्रेजों के पैर जमाने में मदद की और इतिहास के पन्नों में मीर जाफर का नाम बतौर गद्दार हमेशा के लिए दर्ज हो गया। इसी मीर जाफर का वंशज था इस्कंदर मिर्जा।

प्रधानमंत्री जो मिर्जा का शिकार बने
  • मोहम्मद अली बोगराः 17 अप्रैल से 12 अगस्त 1955
  • चौधरी मोहम्मद अलीः 12 अगस्त 1955 से 12 सितंबर 1956
  • हुसैन शहीद सोहरावर्दीः 12 अक्तूबर 1956 से 17 सितंबर 11957
  • इब्राहिम इस्माइल चुंद्रीगरः 17 अक्तूबर 1957 से 16 दिसंबर 1957
  • फिरोज खान नूनः 16 दिसंबर 1957 से 7 अक्तूबर 1958
काबिल सैन्य अधिकारी से राष्ट्रपति बनने का सफर
इस्कंदर मिर्जा बड़े लायक अफसर थे। अंग्रेज भी उन्हें काबिल प्रशासक मानते थे। वो पहले ऐसे भारतीय थे जिन्हें ब्रिटिश सेना की सैंडरहर्स्ट मिलिटरी अकादमी से किंग कमीशन मिला था। बाद में अंग्रेजी हुकूमत ने उनको फौज से राजनीतिक सेवा में भेज दिया था। यही वजह थी कि जब पाकिस्तान बना, तो जिन्ना को देश के रक्षा सचिव के रूप में इस्कंदर मिर्जा से ज्यादा काबिल और अनुभवी कोई नहीं मिला था।
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