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ईरान-अमेरिका के बीच शांति की कोशिशों में लगा पाकिस्तान, अमेरिका ने की तारीफ

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 08 Jan 2020 07:01 PM IST
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इमरान खान (फाइल फोटो)
इमरान खान (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook
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अमेरिकी हमले में मारे गए कासिम सुलेमानी को जननायक की तरह देखने वाली ईरानी जनता के आक्रोश को देखते हुए तमाम देश युद्ध की आशंकाओं से सहमे हुए हैं। ऐसे में पाकिस्तानी प्रधानमत्री इमरान खान की ओर से की जा रही शांति की कोशिशों की अमेरिका ने तारीफ की है। अमेरिकी विदेश विभाग ने पाकिस्तान के प्रति सकारात्मक रुख अपनाया है। इससे लगता है कि पाकिस्तान अब अंतर्राष्ट्रीय विवादों में बीच बचाव करके अपनी स्थिति दुनिया के मंचों पर धीरे धीरे सुधारने की कोशिश में लगा है।
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पाकिस्तान की यह नई अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति है। इसी कड़ी में उसने पहले अफगानिस्तान सरकार और तालिबान के बीच, फिर रियाद और तेहरान के बीच और अब अमेरिका और ईरान के बीच शांति और सुलह की कोशिशों में खुद को अहम किरदार बनाने में लगा पाकिस्तान अपनी छवि सुधारने में लगा है।  

'डॉन' की खबर के मुताबिक पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच तनाव को खत्म करने के लिए पिछले तीन सालों से कोशिशें कर रहा है। इस सिलसिले में इमरान खान अक्टूबर में तेहरान और सउदी अरब भी जा चुके हैं और 3 जनवरी को सुलेमानी की मौत के बाद ये साफ कर चुके हैं कि पाकिस्तान अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी तरह के युद्ध के लिए नहीं होने देगा। लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि मध्य पूर्व के इस संकट को हल करन में वो आज की स्थिति में भी पहल करने में पीछे नहीं हटेगा।

ईरान और अमेरिका के बीच रिश्ते सुधारने की कोशिशों में  पाकिस्तान के अलावा फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे और ओमान के सुलतान भी लगे रहे हैं। लेकिन अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि इन नेताओं की कोशिशों का कोई फायदा नहीं हुआ और ये देश ईरान को समझाने में नाकाम रहे, इसलिए अमेरिका को सुलेमानी की हत्या करनी पड़ी और ईरान के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगाने पड़े।

अमेरिका का आरोप है कि ईरान राजनीतिक और आर्थिक संकट को दूर करने की कोशिश करने के बजाय अमेरिका से बदले की बात कर रहा है।

दूसरी तरफ ईरान ने अमेरिकी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि ये स्थिति सिर्फ डोनल्ड ट्रंप की वजह से पैदा हुई है। ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की शांति की कोशिशों को नकार दिया और उसके उलट ट्रंप हमेशा से ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने और सैन्य कार्रवाई करने के हिमायती रहे हैं। पांच जनवरी को ईरान ने साफ कह दिया है कि अब वह 2015 में अमेरिका और दुनिया के दुसरे शक्तिशाली देशों के बीच हुए परमाणु कार्यक्रम समझौते से खुद को बांध कर नहीं रख सकता।

इस समझौते पर अमेरिका, चीन, रूस, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने दस्तखत किए थे। गौरतलब है कि समझौते में कई कमियां बताते हुए अमेरिका ने खुद को मई 2018 में इससे अलग कर लिया था। न्यूयॉर्क टाइम्स ने ईरान के ताजा रुख और सुलेमानी की हत्या को अमेरिका के लिए खतरनाक बताया है। हालांकि जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने ईरान से कहा है कि वह परमाणु समझौते के खिलाफ कोई कदम न उठाए।
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