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संयुक्त राष्ट्र में भारत: अफ्रीकी देशों में बढ़ता आतंकवाद बड़ा खतरा, मददगारों पर की जाए कार्रवाई

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र Published by: Amit Mandal Updated Thu, 06 Oct 2022 10:32 PM IST
सार

विदेश राज्य मंत्री ने कहा कि अफ्रीका में आईएसआईएल और अल-कायदा से जुड़े समूह खुद को कई घरेलू संघर्षों में शामिल कर रहे हैं और राजनीतिक एजेंडे को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं।

V. Muraleedharan
V. Muraleedharan - फोटो : ANI
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विस्तार

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अफ्रीकी देशों में बढ़ते आतंकवाद की ओर दुनिया का ध्यान आकर्षित किया। विदेश राज्य मंत्री मुरलीधरन ने संयुक्त राष्ट्र में कहा कि  संसाधन संपन्न क्षेत्र का शोषण करने वाले आतंकवादियों सहित बाहरी ताकतों को रोकने के लिए हिंसा मुक्त अफ्रीका आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अफ्रीका के विभिन्न हिस्सों में आतंकवाद की सहायता और समर्थन करने के दोषी और संसाधनों का शोषण करने वालों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। 



आईएसआईएल और अल-कायदा से जुड़े समूह सक्रिय 
अफ्रीका में आईएसआईएल और अल-कायदा से जुड़े समूह खुद को कई घरेलू संघर्षों में शामिल कर रहे हैं और राजनीतिक एजेंडे को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं। इस तरह के समूहों को राष्ट्रीय सुलह में शामिल करने से केवल आतंकवाद को वैधता मिलेगी। हमें इस तथ्य को पहचानना होगा कि आतंकवाद सशस्त्र संघर्षों की तरह अफ्रीका में फैल रहा है।  विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने कहा कि अफ्रीका के विभिन्न हिस्सों में अल-कायदा और आईएसआईएल से जुड़े आतंकवादी समूहों ने हाल के वर्षों में कारीगरों के सोने के अवैध खनन पर फलते-फूलते महत्वपूर्ण ताकत हासिल की है और दुर्लभ खनिज, रत्न, यूरेनियम, कोयला, लकड़ी आदि अवैध व्यापार के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क की सुविधा मिली है। 


अफ्रीका में शांति और सुरक्षा पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बहस को संबोधित करते हुए मुरलीधरन ने कहा कि अल-शबाब जैसे आतंकवादी समूहों ने अपनी आतंकवादी गतिविधियों के लिए विस्तृत राजस्व संग्रह नेटवर्क स्थापित कर लिया है। उन्होंने कहा कि अगर इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो आतंकवाद अफ्रीका के कई हिस्सों में शांति की संभावनाओं को गंभीर रूप से खतरे में डाल सकता है, जो पहले से ही सशस्त्र संघर्षों से तबाह हो चुका है।  

आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में भारत सबसे आगे
विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने कहा संयुक्त राष्ट्र में कहा कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में भारत सबसे आगे रहा है। एक ऐसे देश के रूप में जो पिछले तीन दशकों से खुद राज्य प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद का शिकार रहा है। भारत आतंकवाद की सामाजिक-आर्थिक और मानवीय नुकसान से पूरी तरह अवगत है। भारत आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने में सक्रिय रूप से योगदान देता रहा है। 2018 में हमने पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका में देशों की क्षमता निर्माण को लक्षित करने वाले यूएनओसीटी के कार्यक्रमों में 5,50,000 डॉलर का योगदान दिया और 2021 में 10 लाख डॉलर का योगदान दिया था। 

आतंकवाद विरोधी समिति के अध्यक्ष के रूप में भारत 28-29 अक्टूबर को मुंबई और दिल्ली में अपनी विशेष बैठक की मेजबानी करेगा। यह एक वैश्विक वास्तुकला बनाने की दिशा में सकारात्मक योगदान देगा, जो उद्देश्य के लिए उपयुक्त है और आतंकवादियों द्वारा तैनात नए तकनीकी उपकरणों का प्रभावी ढंग से जवाब देता है। 

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