संयुक्त राष्ट्र में भारत ने चीन को फिर दी मात, अब अगले चार साल तक बनी रहेगी कसक

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Updated Tue, 15 Sep 2020 04:38 AM IST
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TS Tirumurti - फोटो : ANI

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भारत ने संयुक्त राष्ट्र में चीन को पटखनी देते हुए आर्थिक व सामाजिक परिषद (ईसीओएसओसी) की संस्था में जगह बना ली है। भारत अब अगले चार साल के लिए महिलाओं की स्थिति को लेकर बने आयोग ‘सीएसडब्ल्यू’ का सदस्य बन गया है। इस संस्था का सदस्य बनने के लिए चीन के अलावा भारत व अफगानिस्तान इस दौड़ में थे।
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चीन को इस मुकाबले में कुल मतों के आधे भी नहीं मिल सके। सिर्फ यही नहीं मंगलवार को उप स्थायी प्रतिनिधि के नागराज नायडू ने एक ट्वीट के द्वारा जानकारी देते हुए बताया कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र के दो अन्य निकायों के चुनावों में जीत हासिल की है। इस तरह से भारत कुल तीन ईसीओएसओसी निकायों के लिए चुना गया है। 
लैंगिक समानता के क्षेत्र में काम करने वाली सीएसडब्ल्यू (कमीशन ऑन स्टेटस ऑफ वुमन) संस्था संयुक्त राष्ट्र की ईसीओएसओसी का हिस्सा है। इसमें भारत का कार्यकाल वर्ष 2021 से शुरू होकर 2025 तक चलेगा। तीन देश इसके सदस्य बनने की दौड़ में थे जिनमें बारत और अफगानिस्तान को 54 देशों द्वारा किए गए मतदान में जीत मिली।
भारत के पक्ष में कुल 38 मत गिरे जबकि संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान के राजदूत एडेला रेज के नेतृत्व में 39 वोट पड़े। चीन 28 मत पाक आवश्यक बहुमत पाने में नाकाम रहा। पहले ही कई मोर्चे पर शिकस्त खा रहे चीन को इस मुकाबले में करारी हार का सामना करना पड़ा। ईसीओएसओसी में एक वक्त में 45 सदस्य होते हैं। 11 सदस्य एशिया से चुने जाते हैं, जबकि 9 लैटिन अमेरिका व कैरेबियाई देशों से, 8 पश्चिमी यूरोप से और चार पूर्वी यूरोप से होते हैं। 
 
तिरुमूर्ति ने जताया आभार
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने इस बारे में जानकारी देते हुए ट्वीट किया कि भारत ने यूएन की एक अहम काउंसिल ईसीओएसओसी की सीएसडब्लू समिति में जगह बनाई है। यह बताता है कि लैंगिग समानता और महिला सशक्तिकरण को लेकर हम कितने गंभीर प्रयास कर रहे हैं। समर्थन देने वाले देशों के हम शुक्रगुजार हैं।

चीन में महिलाओं का खराब रिकॉर्ड
यूएन में इन नतीजों को चीन द्वारा महिलाओं के समानता और सशक्तिकरण के खराब रिकॉर्ड के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। जबकि भारत की जीत बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया के कई देश मानते हैं कि भारत में महिलाओं की बेहतरी के लिए काम किए जा रहे हैं।
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