‘मतभेदों के बावजूद देश के लिए बनाए रखें एकता’, बाइडन के भाषण की 10 बड़ी बातें

सार

  • जो बाइडन ने अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति पद की शपथ ली, भाषण में हिंसा, नस्लवाद, असमानता और महामारी से जूझते देश के विकट हालात किए बयान
  • आपसी वैमनस्य को भुलाने का किया आह्ववान।
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Jeet Kumar वर्ल्ड डेस्क, वाशिंगटन Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 21 Jan 2021 10:29 AM IST
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन - फोटो : PTI

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विस्तार

अमेरिका की कैपिटल इमारत में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट द्वारा शपथ दिलाने के साथ ही जोसफ रोबिनेट बाइडन जूनियर अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति बन गए। उन्हाेंने अपने पहले भाषण में देशवासियों से एकजुट होकर कोरोना महामारी, आर्थिक बदहाली और आपसी वैमनस्य से उबरने का निवेदन किया।
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बाइडन के साथ ही कमला हैरिस ने भी अमेरिका की पहली महिला व अश्वेत उपराष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली। राष्ट्रपति के तौर पर शपथ लेते हुए बाइडन ने अमेरिकी नागरिकों से कहा कि उन्हें राजनीति को अलग रख कर एक देश के रूप में इस महामारी से लड़ना होगा। तभी सब एक साथ इन हालात से बाहर निकल सकेंगे।


उन्हाेंने कैपिटल इमारत में दक्षिणपंथियों द्वारा की गई हिंसा का कई बार जिक्र भाषण में किया और लोगों को आपसी मतभेदों के बावजूद एक दूसरे की मदद करने और आगे बढ़ने की अपील की। शपथ ग्रहण के दौरान उनकी पत्नी जिल ने बाइबल थामी, जिस पर बाइडन ने शपथ के लिए हाथ रखा।

उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को सुप्रीम कोर्ट जज सोनिया सोटोमेयर ने शपथ दिलाई। अमेरिका की पहली महिला, अश्वेत और दक्षिण एशियाई मूल की उपराष्ट्रपति हैरिस को हिस्पैनिक (स्पेनिश) समुदाय से ताल्लुक रखने वालीं सोनिया द्वारा शपथ दिलाकर, अमेरिका में विविधता का सम्मान है, यह प्रदर्शित किया गया।

परिवारों के साथ कैपिटल इमारत पहुंचने से पहले बाइडन और कमला हैरिस वाशिंगटन के सेंट मैथ्यूज कैथेड्रल की प्रार्थना में पहुंचे। यहां मंगलवार रात कोरोना महामारी के मृतकों की स्मृति में सभा रखी गई थी। अमेरिकी समय के अनुसार सुबह 10:30 बजे कैपिटल में शपथग्रहण समारोह में बाइडन और हैरिस पहुंचे। लेडी गागा ने अमेरिकी राष्ट्रगान ‘स्टार्ड स्पैंगल्ड बैनर’ और जेनिफर लोपेज ने ‘दिस लैंड इज यॉर लैंड’ गाया।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में पदग्रहण समारोह से ठीक पहले बम धमाका करने की धमकी दी गई। नेशनल गार्ड्स ने तुरंत इमारत को बंद कर जांच की। यह धमकी फर्जी निकली। इमारत पहले ही कोविड-19 की वजह से आम लोगों के लिए बंद थी। अधिकतर जज भी पदग्रहण समारोह में शरीक होने गए हुए थे। किसी को बाहर निकालने की जरूरत नहीं पड़ी।
 

बाइडन का भाषण 10 बिंदुओं में:-


1. लोकतंत्र का दिन
यह अमेरिका का दिन है, लोकतंत्र का दिन है। सदियों से जिसके लिए अमेरिका की परीक्षा ली जाती रही, हम उसमें उत्तीर्ण हुए है। आज हम एक प्रत्याशी नहीं, लोकतंत्र की जीत का उल्लास मना रहे हैं। लोकतंत्र मूल्यवान है, नाजुक है, लेकिन हमारे प्रयासों से जी उठा है।

2. हालात की विकटता बताई
हम 200 से अधिक सालों से शांतिपूर्ण ढंग से सत्ता का परिवर्तन करते आए है। हम बहुत दूर तक चले तो आए हैं, लेकिन अभी और बहुत दूर जाना भी है। हम एक बेहतर संयुक्त राष्ट्र बनाने का प्रयास करते रहेंगे।

इसके लिए आज बहुत कुछ सुधारना, निर्माण करना और हासिल करना बाकी है। इतिहास में कुछ ही लोगों ने आज जैसे हमारे हालात सहे हैं। हमने जितने लोग विश्वयुद्धों में गंवाएं, उससे अधिक इस महामारी में मारे गए हैं, लाखों नौकरियां खत्म हुई, हिंसा और नुकसान हुआ।

3. श्वेत प्रभुत्ववाद को खतरा और एकता को सुधार का रास्ता
श्वेत प्रभुत्ववाद और घरेलू हिंसावादियों से हमें देश को बचाना है। यह देश के लिए खतरा हैं। इसके खिलाफ हमें एकता चाहिए। मैं सभी अमेरिकियों को साथ आने के लिए आमंत्रित करता हूं। एकता से ही अब तक हुई गलतियां सुधार सकते हैं, अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दे सकते हैं, नौकरियां बढ़ा सकते हैं, नस्लवादी भेदभाव में न्याय दे सकते हैं, हिंसा खत्म कर सकते हैं, मध्यमवर्ग को फिर से मजबूत बना सकते हैं।

4. दुश्मन नहीं,  समान रूप से देखें एकदूसरे को
हमारा इतिहास नस्लवाद, भेदभाव और लोकतंत्र विरोधी विचारोें के खिलाफ सभी मानव को समान मानने वाले विचार के लगातार चले संघर्षों का इतिहास है। समानता का विचार हमेशा जीता है। हम आज भी इसे जीताएंगे। हम एकदूसरे को दुश्मन नहीं, पड़ोसी की तरह समान रूप  से देखें। ऐसा नहीं करेंगे तो असुरक्षा, कड़वाहट और बढ़ेगी। कोई देश गड़बड़ी भरे हालात में आगे नहीं बढ़ सकता। हमें इस क्षण संयुक्त राष्ट्र के तौर पर खड़ा रहना होगा। नई शुरुआत करते हैं, एकदूसरे को सुनते हैं, बोलने देते हैं।

5. गृहयुद्ध, महिलाओं से भेदभाव और हिंसा मिटाकर यहां पहुंचे हैं
देशवासियों, हमें बेहतर बनना होगा। अपने चारों ओर देखें, आज हम कैपिटल के गुंबद के साये में खड़े हैं, जो गृहयुद्ध के समय बना। 108 साल पहले महिलाओं को मतदान के अधिकार के लिए खड़े होने पर रोका गया, लेकिन आज हम एक अश्वेत महिला को उपराष्ट्रपति बनते देख रहे हैं। आज हम उस पवित्र स्थल पर खडे़ हैं जिसे दो हफ्ते पहले दक्षिणपंथियों की भीड़ ने बिगाड़ने का प्रयास किया था, लेकिन हमने ऐसा नहीं होने दिया, न कभी होने देंगे।

6. असहमति बनी रहे, एकता न टूटे
अगर आप किसी से असहमत हैं तो यह कोई गलत बात नहीं, बल्कि यही अमेरिका का विचार है। लेकिन इसकी वजह से एकता खंडित नहीं होनी चाहिए। कई देशवासी अपनी नौकरियों, हेल्थकेयर, लोन राशि चुकाने की चिंताओं से घिरे हैं। इन हालात में हम क्या उनसे नफरत करेंगे जो हमसे अलग दिखते हैं, अलग धर्म मानते हैं, अलग अखबार पढ़ते हैं?

7. सत्य की रक्षा संविधान का सम्मान 
बीते महीनों ने हमें सिखाया कि सच में भी झूठ छिपाया जाता है। हमें संविधान का सम्मान करना है तो सत्य की रक्षा करें और असत्य को हराएं। मैं सभी अमेरिकियों का राष्ट्रपति हूं। जिन्हाेंने मेरा समर्थन नहीं किया, मैं उनके हकों के लिए भी उतनी ही शिद्दत से लडूृंगा जितना उनके लिए जिन्हाेंने मुझे वोट किया।

8. कभी मदद लेंगे, कभी करेंगे, इसी से समृद्धि आएगी
जीवन में कोई कभी न कभी आपको किसी की मदद जरूरत पड़ेगी, कभी आप भी मदद देने के सक्षम होंगे। इसी से देश आगे बढ़ेगा, समृद्ध होगा। असहमति के बीच भी हमें पूरी शक्ति इस काले समय से निकलने के लिए लगानी है।

9. विश्व में महत्वपूर्ण साझेदार बनेंगे
दुनिया हमें देख रही है। जो हमारी सीमाओं से परे हैं, उन्हें कहना चाहूंगा कि हम न केवल इस विकट समय से उबरेंगे बल्कि कल की चुनौतियों के लिए तैयार रहेंगे। शांति, प्रगति और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय साझेदार की भूमिका निभाएंगे।

10. निडर होकर खड़े हो जाएं, बहुत काम करना है
हमने वायरस, असमानता, नस्लवाद, हिंसा को सहा, लेकिन अब हमारी चुनौती निडर होकर खड़े होने की है क्योंकि काफी काम करना है। इन बढ़ती चुनौतियों से हम निपटते हैं, अपने बच्चाें को एक बेहतर दुनिया दे पाते हैं, तभी हम हम अमेरिका की कहानी का हिस्सा बने पाएंगे। हमारा काम हमारी कहानी कहेगा। हमारे बच्चे और उनके बच्चे अपनी कहानियों में लिखेंगे कि किस तरह हमने अपने बिखरते देश को संवारा। यह उम्मीद, एकता और महानता की कहानी होगी, डर व बिखराव की नहीं। वे लिखेंगे कि हमने हमारी निगहबानी में लोकतंत्र को मरने नहीं दिया, उसे बचाया।
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