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खराब रिश्ते: फेसबुक के जुकरबर्ग और एपल के टिम कुक इस तरह बने दुश्मन

न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, सेन फ्रांसिस्को Published by: Kuldeep Singh Updated Sat, 01 May 2021 06:35 AM IST

सार

  • 2 साल बाद फेसबुक और एपल एक-दूसरे के खिलाफ खुला युद्ध छेड़ चुके हैं
  • इसी हफ्ते सोमवार को आईफोन में नया प्राइवेसी फीचर जारी किया है 
  • नया प्राइवेसी फीचर के जरिए आईफोन यूजर्स की अनुमति के बाद ही फेसबुक और उसके जैसे एप यूजर को ट्रैक कर सकेंगे
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विस्तार

सैन फ्रांसिस्को सन वैली में जुलाई 2019 में हुई बैठक में एपल के टिमोथी डी कुक (टिम कुक) और फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग ने बैठक कर बिगड़े आपसी संबंध सुधारने की कोशिश की। उस समय कैंब्रिज एनालिटिका स्कैंडल की वजह से फेसबुक को अमेरिकी सांसद, नियामक एजेंसी और कुक सहित कई बड़ी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी आलोचना के निशाने पर ले रहे थे।



फेसबुक ने करीब 5 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं की प्रोफाइलिंग कर चुनावों को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करने वाली फर्म एनालिटिका फर्म को इस्तेमाल करने दी थी। बैठक में जुकरबर्ग ने पूछा था स्कैंडल को कैसे हैंडल करते? कुक ने जवाब में कहा मैं फेसबुक छोड़ कंपनी से जुड़े बाकी सारे एप से लोगों का डाटा डिलीट कर देता। जुकरबर्ग जवाब से हतप्रभ रह गए।


फेसबुक का कारोबार ही लोगों के निजी डाटा भंडार से चलता है। इसी से उसे विज्ञापन मिलते हैं। वह सालाना 7,000 करोड़ डॉलर कमाता है। कुक ने उन्हें कह दिया था कि फेसबुक का कारोबार डावांडोल है। आज 2 साल बाद दोनों एक-दूसरे के खिलाफ खुला युद्ध छेड़ चुके हैं। इसी हफ्ते सोमवार को आईफोन में नया प्राइवेसी फीचर जारी किया है। इसमें आईफोन यूजर्स की अनुमति के बाद ही फेसबुक और उसके जैसे एप यूजर को ट्रैक कर सकेंगे। यूजर ट्रैक करना विज्ञापन कारोबार की रीढ़ है।

फेसबुक जैसी तकनीकी कंपनियों डिजिटल विज्ञापन के लिए लोगों की ऑनलाइन आदतों को ट्रैक कर अध्ययन करती हैं। इसके दम पर उन्हें टारगेटेड विज्ञापन भेजती है। अनुमान है कि एपल के इस नए फीचर से अधिकतर लोग फेसबुक कि यह ट्रैकिंग रोक देंगे।

इतने खराब हैं संबंध कि एपल के सह संस्थापक स्टीव जॉब्स के साथ मार्क जुकरबर्ग खाने और टहलने के लिए जा चुके हैं। कुक गूगल के संस्थापक लैरी पेज से नियमित मिलते हैं लेकिन कुक और जुकरबर्ग ऐसी अनौपचारिक मुलाकात नहीं करते।

ऐसे हुई थी अदावत की शुरुआत
2010 में एपल के डिजिटल सर्विस संभाल रहे एडी क्यू ने सॉफ्टवेयर पार्टनरशिप के लिए जुकरबर्ग से बैठक की। यहां जुकरबर्ग ने एपल को समझाया दिया कि अगर वे कोई समझौता करते हैं तो एपल को झुकना होगा, वरना फेसबुक अकेला काम कर खुश है। एपल ने इसे मार्क जुकरबर्ग के घमंड के तौर पर देखा। यह दोनों कंपनियों व उनके मुखियाओं की अदावत की शुरुआत थी। 

लेकिन समय एक दूसरे पर निर्भर कर दिया
दोनों की दुश्मनी कई बार जाहिर होती रही, पर दोनों के कारोबार समय के साथ एक-दूसरे पर निर्भर होते चले गए। आईफोन मुख्य उपकरण बन गया जिसके जरिए लोग फेसबुक के एप इस्तेमाल करते हैं। दूसरी और फेसबुक और उसके द्वारा खरीदे जा चुके व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम एपल के एप स्टोर पर सबसे ज्यादा डाउनलोड किए जाने वाले एप बन गए।

कारोबारी संशय भी बड़े
2014 के आसपास फेसबुक को महसूस होने लगा कि एप्पल उसके ऐप को बढ़ने से रोक सकता है। चिंता तब और बढ़ी जब एपल ने कई बार फेसबुक के एप के अपडेट्स को अपने एप स्टोर पर जारी करने में देरी की।

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