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अमेरिका: एक दिन में 1.42 लाख मरीज भर्ती, छह प्रांतों के अस्पतालों में सेना तैनात, यूएन ने कहा- भारत में बनने लगे पिछले साल जैसे हालात

एजेंसी, वाशिंगटन। Published by: योगेश साहू Updated Fri, 14 Jan 2022 05:14 AM IST
सार

कोविड-19 के डेल्टा स्वरूप ने भारत में पिछले साल अप्रैल-जून के बीच 2,40,000 लोगों की जिंदगियां छीन लीं और आर्थिक हालत में सुधार को बाधित कर दिया। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में यह जानकारी देते हुए चेतावनी दी गई है कि जल्द ही यह हालत दोबारा हो सकती है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
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विस्तार

कोविड संक्रमण और खासतौर पर ओमिक्रॉन वैरिएंट की तेज रफ्तार ने अमेरिका में हाहाकार मचा दिया है। बृहस्पतिवार को 8,51, 910 नए संक्रमित आए। अस्पतालों में पिछले 24 घंटे के दौरान 1,42,388 मरीज भर्ती किए गए। नतीजे में कई राज्यों में मेडिकल ढांचा चरमरा गया है। हालात बेकाबू होते देखकर राष्ट्रपति जो बाइडन ने मिशिगन, न्यूजर्सी, न्यू मेक्सिको, न्यूयॉर्क, ओहायो और रॉड आईलैंड के अस्पतालों में मदद के लिए सैनिक रवाना किए हैं।



अमेरिका में एक दिन में 1,827 संक्रमितों की मौत हुई है और अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या पिछले दो सप्ताहों में 80 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुकी है। मौतों की संख्या में भी 40 फीसदी इजाफा दर्ज किया गया है। मरीजों के इलाज और देखभाल में जुटे डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ में में भी बड़ी संख्या में संक्रमण फैलने के बाद से अस्पतालों में हालात बिगड़ गए हैं। अस्पतालों में मेडिकलकर्मियों की मदद के लिए राष्ट्रपति बाइडन ने छह राज्यों में 1,000 सैनिक रवाना किए हैं। इसके अलावा कम प्रभावित राज्यों से डॉक्टरों, नर्सों और अन्य मेडिकलकर्मियों की टीमें भी इन छह राज्यों के अस्पतालों को भेजी गई हैं। एजेंसी


टीका न लगवाने वालों के लिए खतरनाक है ओमिक्रॉन
डब्ल्यूएचओ प्रमुख टेड्रॉस गेब्रेयेसिस ने कहा है कि कोविड-19 का ओमिक्रॉन वैरिएंट उन लोगों के लिए खासतौर पर खतरनाक है जिन्हें इस बीमारी का टीका नहीं लगा है। उन्होंने कहा, वैसे यह वैरिएंट डेल्टा की तुलना में कम गंभीर है लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि इससे कोई खतरा नहीं है। उन्होंने कहा, ओमिक्रॉन के चलते भी लोगों को अस्पतालों में भर्ती होने की नौबत आ रही है। इसलिए सावधानी जरूरी है।

कनाडा में टीके से इनकार पर देना होगा टैक्स
कनाडा के क्यूबेक प्रांत ने करोना का टीका लगवाने से इनकार करने वालों के लिए नया नियम लागू किया है। ऐसे लोगों को अब टैक्स देना पड़ेगा। प्रांत के प्रीमियर फ्रांस्वा लेगॉल्ट ने कहा है कि करीब 10 फीसदी नागरिकों ने कोरोना टीके की पहली खुराक नहीं ली है। ये लोग स्वास्थ्य नेटवर्क पर आर्थिक बोझ बढ़ा रहे हैं और अन्य नागरिकों के लिए खतरा बढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही क्यूबेक पहली ऐसी जगह बन गया है जहां कोरोना वैक्सीन न लगवाने वालों पर टैक्स लगाया जाएगा। फ्रांस्वा ने कहा, मुझे लगता है जिन 90 फीसदी लोगों ने वैक्सीन ली है, हमें उन्हें भय मुक्त होने देना चाहिए।

अमेरिका : भ्रम व संकट के बीच परीक्षण पर फोकस
अमेरिका में कोविड-19 परीक्षण की आपूर्ति और पहुंच की भारी कमी और लंबी कतारों को लेकर बढ़ती आलोचना के बीच बाइडन प्रशासन दोबारा कोरोना परीक्षण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। हालांकि ओमिक्रॉन के उछाल के बीच प्रशासन में इस बात पर भ्रम है िकि यह परीक्षण कब से शुरू किया जाए। व्हाइट हाउस ने कहा है कि आपूर्ति की कमी दूर करने और स्कूल खोलने को बढ़ावा देने के लिए इस माह विद्यालयों को 50 लाख रैपिड टेस्ट और 50 लाख लैब आधारित पीसीआर परीक्षणों की एक शृंखला उपलब्ध कराई जाएगी। इसमें कई स्वास्थ्य विशेषज्ञ शामिल होंगे।

भारत में फिर पिछले साल जैसे बनने लगे हालात : यूएन
कोविड-19 के डेल्टा स्वरूप ने भारत में पिछले साल अप्रैल-जून के बीच 2,40,000 लोगों की जिंदगियां छीन लीं और आर्थिक हालत में सुधार को बाधित कर दिया। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में यह जानकारी देते हुए चेतावनी दी गई है कि जल्द ही यह हालत दोबारा हो सकती है। ‘वैश्विक आर्थिक हालात और संभावनाएं’ (डब्ल्यूईएसपी) फ्लैगशिप रिपोर्ट में कहा गया गया है कि कोरोना के बेहद संक्रमक ओमिक्रॉन स्वरूप के कारण संक्रमण की नई लहर चल पड़ी है। इससे महामारी के इंसानों और आर्थिक हालात को फिर से प्रभावित करने की आशंका है।

संयुक्त राष्ट्र में आर्थिक और सामाजिक मामलों की अवर महासचिव लियू झेनमिन ने कहा कि कोविड-19 से निपटना वैश्विक सहयोग के बिना संभव नहीं है। जब तक वैक्सीन सभी तक नहीं पहुंचेगी, तब तक महामारी वैश्विक अर्थव्यवस्था के सुधार के लिए सबसे बड़ा खतरा बनी रहेगी। भारत में स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अब तक 154.6 करोड़ से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। कोरोना की दूसरी लहर ने देशभर में कहर बरपाया था।

इसमें संक्रमण के साथ ही मृत्युदर तेजी से बढ़ी थी। देश के स्वास्थ्य ढांचे पर इससे खासा दबाव पड़ा था। देश में अब ओमिक्रॉन के मामले बढ़ रहे हैं। जल्द ही यह दुनियाभर में डेल्टा से ऊपर पहुंच जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे दक्षिण एशिया के एजेंडा-2030 हासिल करने में विपरीत स्थितियां उत्पन्न होंगी। वैक्सीनेशन की सुस्त रफ्तार से क्षेत्र में नए वैरिएंट के हावी होने की आशंका रहेगी।
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