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हवा में कोरोना: अब मास्क और दूरी नाकाफी, लैंसेट में विशेषज्ञों ने दिया और बड़े खतरे का संकेत

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला लंदन Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sat, 17 Apr 2021 03:19 AM IST

सार

  • ऑक्सफोर्ड की ग्रीनहाल ने कहा-परिभाषा बदले डब्ल्यूएचओ
  • ब्रिटेन, अमेरिका व कनाडा के छह विशेषज्ञों ने किया रिव्यू
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : iStock

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समूचे विश्व को भयभीत कर रही कोरोना महामारी को लेकर और बड़ा दावा किया गया है।  विश्व की प्रमुख स्वास्थ्य पत्रिका लैंसेट में प्रकाशित एक अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना वायरस हवा के साथ तेजी से फैलता है। सॉर्स कोव-2 वायरस को लेकर अब तक प्रकाशित अध्ययनों की एक समीक्षा रिपोर्ट ब्रिटेन, अमेरिका व कनाडा के वैज्ञानिकों ने तैयार की है। आइये जानते हैं, क्या कहा गया है रिपोर्ट में-
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इस समीक्षा रिपोर्ट की मुख्य लेखिका ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की त्रिश ग्रीनहाल हैं। उनका दावा है कि वक्त आ गया है जब विश्व स्वास्थ्य संगठन को वायरस के संक्रमण की परिभाषा बदलने की जरूरत है। अब मास्क, सुरक्षित शारीरिक दूरी जैसे कोरोना से बचाव के उपाय बौने हो गए हैं। 

इस तरह की गई समीक्षा
कोरोना अध्ययनों की नई समीक्षा में कागिट कॉयर इवेंट की गई। इसमें एक संक्रमित व्यक्ति को शामिल किया गया। वह सुपर स्प्रेडर साबित हुआ और उसने 53 लोगों को संक्रमित कर दिया। इनमें से कई लोग तो आपस में संपर्क में भी नहीं आए थे। ऐसे में माना जा रहा है कि यह हवा में व्याप्त कोरोना वायरस से संक्रमित हुए।

बंद जगह संक्रमण ज्यादा पाया गया
समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार खुली जगहों की बजाय बंद जगहों पर कोरोना संक्रमण ज्यादा तेजी से फैलता है। इन स्थानों को हवादार बनाकर संक्रमण के फैलाव को कम किया जा सकता है।

कोई लक्षण नहीं दिखे
40 प्रतिशत वायरस ट्रांसमिशन ऐसे लोगों से हुआ, जिनमें कोई लक्षण नहीं था। इन्हीं बिना लक्षण वाले मरीजों ने सब दूर महामारी फैलाई। इसी तरह संक्रमित व्यक्ति की छींक या श्वास से निकलने वाले भारी कणों से वायरस तेजी से फैलने के संकेत कम मिले हैं। इनसे सतह के संक्रमित होने का खतरा है। 

हाथ धोना व सतह साफ करना उपयुक्त
ऐसे में मास्क व दूरी से ज्यादा जरूरी हाथ धोना और सतह को साफ करना ज्यादा उपयुक्त है। साथ ही वायरस को हवा में ही खत्म करने के उपाय करना चाहिए। 

32 देशों के 200 वैज्ञाानिकों ने लिखी थी डब्ल्यूएचओ को चिट्ठी
कोरोना वायरस हवा में फैलता है, इसे लेकर 32 देशों के 200 वैज्ञानिकों ने पिछले साल जुलाई में भी डब्ल्यूएचओ को पत्र लिखा था। उन्होंने यह भी कहा था कि छोटे-छोटे ड्रापलेट्स भी किसी को संक्रमित कर सकते हैं। अब विश्व स्वास्थ्य संगठन को जल्द इस दावे की पुष्टि कर कदम उठाने चाहिए, ताकि संक्रमण को रोका जा सके। 

खांसते, छींकते, बोलते, गाते वक्त निकले ड्रॉपलेट्स भी कर सकते हैं संक्रमित
शोधकर्ताओं का दावा है कि यदि कोई व्यक्ति संक्रमित है और वह खांसता, छींकता, बोलता या गाता है तो भी हवा में फैले उसके वायरस दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं। 

ऐसे कर सकते हैें बचाव
वैज्ञानिकों ने ऐसे हालात से निपटने के उपाय भी सुझाए हैं। उन्होंने कहा कि वेंटिलेशन, एयर फिल्टर, भीड़ कम करने, खुले में लोगों को कम रहने देने जैसे उपायों से हवा में फैलने वाले वायरस से बचाव किया जा सकता है। जब भी बंद कमरे में रहे तो भी मास्क पहनें और कार्यस्थल पर पीपीई किट पहनकर काम करने से भी इससे बचा जा सकता है। 


 

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