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एवरेस्ट को भी निगलने की फिराक में ड्रैगन, सबसे ऊंची चोटी पर बनाया 5जी इंटरनेट बेस स्टेशन

अमर उजाला ब्यूरो Published by: Rajeev Rai Updated Mon, 11 May 2020 10:40 AM IST
माउंट एवेरेस्ट पर चीन का 5जी नेटवर्क
माउंट एवेरेस्ट पर चीन का 5जी नेटवर्क - फोटो : social media
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चीन के सरकारी टीवी चैनल चाइना ग्लोबल टेलीविजन नेटवर्क (सीजीटीएन) की आधिकारिक वेबसाइट ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को अपना बता दिया। चैनल ने कहा, ‘माउंट क्वामोलैंग्मा पर शुक्रवार को सूर्य की रोशनी का असाधारण नजारा। दुनिया की यह सबसे ऊंची चोटी चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में स्थित है।’



हालांकि, चीन के इस अप्रत्याशित कदम का नेपाल में विरोध भी शुरू हो गया है और लोगों ने अपनी सरकार से चीन को सबक सिखाने की मांग तक कर डाली है। चीन और नेपाल ने 1960 में सीमा विवाद के समाधान के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके मुताबिक माउंट एवरेस्ट को दो हिस्सों में बांटा जाएगा। इसका दक्षिणी हिस्सा नेपाल के पास रहेगा जबकि उत्तरी हिस्सा तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के पास होगा। तिब्बत पर चीन का कब्जा है।


चीन के 5जी नेटवर्क से भारत भी चिंतित
चाइना मोबाइल और हुआवे कंपनी ने माउंट एवरेस्ट के तिब्बत की ओर 6500 मीटर की ऊंचाई पर 5 जी इंटरनेट बेस स्टेशन निर्माण किया है। विशेषज्ञ माउंट एवरेस्ट पर चीन द्वारा 5 जी नेटवर्क लगाए जाने से चिंतित है। इस कदम से पूरा हिमालय उसकी जद में आ सकता है। 5जी नेटवर्क का सामरिक पहलू भी है क्योंकि इसे समुद्र तल से 8,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया है। इससे चीन अपने नापाक इरादों के साथ भारत, बांग्लादेश और म्यांमार पर नजर रख सकता है।

सोशल मीडिया पर ट्रोल हुआ चीन, नेपालियों ने कहा, यह हमारा गौरव
चीन के सरकारी चैनल सीजीटीएन के दावे में एवरेस्ट को तिब्बती स्वायत्त क्षेत्र में बताने पर नेपाल के लोग भड़क गए हैं। सोशल मीडिया पर भारत और नेपाल के लोगों ने चीन को ट्रोल करना शुरू कर दिया। हैशटैग बैकऑफचाइना ट्रेंड करने लगा। एक यूजर ने ट्वीट में कहा, एवरेस्ट नेपाल में स्थित है न कि चीन में। फर्जी खबरें फैलाना बंद करो। वहीं, कुछ यूजर ने कहा, माउंट एवरेस्ट हमारा गौरव है और हमेशा रहेगा। एक यूजर से लिखा-चीन की इस हरकत को नेपाल की सरकार को कतई बर्दाश्त नहीं करना चाहिए और इस पर चीन सरकार से सफाई मांगी जानी चाहिए।

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