चीन का सैन्य रिजर्व बल जिनपिंग के नियंत्रण में, अमेरिकी पत्रकार ने ड्रैगन पर साधा निशाना

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 30 Jun 2020 07:07 AM IST
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग - फोटो : Facebook

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चीन में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी का वर्चस्व बनाए रखने के लिए राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सैन्य रिजर्व बल को 1 जुलाई से अपने नियंत्रण में ले लिया है। दरअसल इस बल को कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) और सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (सीएमसी) के केंद्रीकृत और एकीकृत नियंत्रण में रखा गया है और इन दोनों के प्रमुख राष्ट्रपति जिनपिंग ही हैं।
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वर्तमान में रिजर्व बल सैन्य अंगों और स्थानीय कम्युनिस्ट पार्टी समितियों के संयुक्त नेतृत्व में है जिन्हें अब 1 जुलाई से सीपीसी और सीएमसी के अधीन लाया जा रहा है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने 2017 में रिजर्व बल की शक्ति कम करने और सेना में सुधार के तहत इसे केंद्रीय नेतृत्व के नियंत्रण में लाने  की योजना बनाई थी। इन सुधारों में विश्व के सबसे बड़े सैन्य बल में तीन लाख सैनिकों की संख्या घटाकर 20 लाख करना भी शामिल था।

सीमा पर चीन की उकसावे की कार्रवाई रणनीतिक भूल: अमेरिकी पत्रकार

चीन ने टकराव की विदेश नीति अपनाई है। वह कोरोना महामारी का फायदा उठाकर पूरी दुनिया में अपना प्रभाव बढ़ाने में लगा है। हालांकि, हाल ही में सीमा पर भारत के खिलाफ उकसावे की कार्रवाई चीन की रणनीतिक भूल है। एक अमेरिकी पत्रकार फरीद जकारिया ने वाशिंगटन पोस्ट में अपनी इन टिप्पणियों से चीन पर निशाना साधा है।
जकारिया ने कहा, ऐसे समय में जब अमेरिका कोरोना महामारी की चुनौतियों से जूझ रहा है, कई विशेषज्ञों ने चेताया है कि चीन इस हालात का फायदा उठाकर पूरी दुनिया में अपना प्रभाव बढ़ाने में लगा है। गलवां घाटी में चीन की इस हरकत से दोनों देशों के बीच अरसे तक विवाद बना रहेगा।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान का उदाहरण देते हुए जकारिया ने कहा, चीन के राजनयिकों की नई पौध लड़ाकू भेड़िए के रूप में है। जो आक्रामक अंदाज में अपने देश का प्रचार करते हैं। वे मानते हैं कि अपराध सबसे अच्छा बचाव है। उन्होंने लिखा कि झाओ वैसे भी शातिर और अभद्र भाषा के लिए जाने जाते हैं। हाल के दिनों में चीन के अपने पड़ोसियों से रिश्ते खराब ही हुए हैं।

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