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'नकलची' चीन ने किया कमाल, अमेरिका के इस खास हेलीकॉप्टर का बना दिया क्लोन

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 14 Oct 2019 06:09 PM IST
Harbin Z-20 Chinese Helicopter
Harbin Z-20 Chinese Helicopter - फोटो : China Daily
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चीन के बारे में एक खास बात जो दुनियाभर में मशहूर है कि वह ‘नकलची’ बहुत बढ़िया है। चीन को रिवर्स इंजीनियरिंग में महारत हासिल है। आईफोन की कॉपी से लेकर विदेशी सैन्य हथियारों की कापी करने में चीन का कोई जवाब नहीं है। अमेरिकी सी-17, एफ-35, एफ-22, प्रीडेटर ड्रोन, एंटी टैंक मिसाइल एफजीएम-148 की नकल करने के बाद चीन ने अमेरिका के एक खास हथियार ब्लैक हॉक की कापी की है।

चीनी 'ब्लैक हॉक' का नाम हार्बिन Z-20

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के सामने अमेरिकी की हर लेटेस्ट टेक्नोलॉजी बेकार है। अमेरिका की तमाम पेटेंट लेटेस्ट मिलिट्री टेक्नोलॉजी के क्लोन तैयार करने के बाद चीन ने अमेरिकी के प्रसिद्ध सीकोरस्काई यूएच-60 ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर का क्लोन तैयार किया है। चीनी ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर का नाम हार्बिन Z-20 है और चीनी सेना को सौंप दिया गया है। इस हेलीकॉप्टर को दुनिया का सबसे बेहतरीन मीडियम लिफ्ट यूटिलिटी कॉप्टर बताया जा रहा है।

हर पुर्जे को चीन में ही बनाया

ट्विन इंजन वाले Z-20 हेलीकॉप्टर को एविएशऩ इंडस्ट्री कॉर्प ऑफ चाइना ने बनाया है। इसकी खासियत है कि मश्किल मौसमी हालातों में भी उड़ सकता है। चीन का दावा है कि इस हेलीकॉप्टर के हर पुर्जे को चीन में ही बनाया गया है। चीन की एवीआईसी के चाइना हेलीकॉप्टर रिसर्च एंड डेवलेपमेंट इंस्टीट्यूट के मुख्य तकनीकी विशेषज्ञ ली लिनहुआ का कहना है कि एरोडाइनेमिक स्ट्रक्चर वाले Z-20 में लेटेस्ट एंटी-आइसिंग टेक्नोलॉजी और लेटेस्ट कंट्रोल सिस्टम दिया गया है।  

H-60M black hawkकम-ऑक्सीजन वाले इलाके में भी भर सकता है उड़ान

इसी महीने 09 अक्टूबर को तियांजिन में हुए पांचवे चाइना हेलीकॉप्टर एक्सोपोजिशन में इस हेलीकॉप्टर को पहली बार प्रदर्शित किया गया। इससे पहले इसकी चोरी-छिपे ली गईं अस्पष्ट तस्वीरें सामने आती थीं, लेकिन चीन ने कभी इसे आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया था। Z-20 के इंजन इतने पावरफुल हैं कि कम-ऑक्सीजन वाले इलाके में भी उड़ान भरने में सक्षम है। इसमें एक्टिव वाइब्रेशन कंट्रोल, फ्लाई-बाई-वायर, लो नॉयज रोटर डिजाइन जैसे फीचर भी दिए गए हैं। इसमें एडवांस फ्लाई-बाई-वायर टेक्नोलॉजी कुछ ही देशों के पास है, जिससे हेलीकॉप्टर का वजन कम होने साथ ड़ने में भी आसानी होती है। इस हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल कार्गो ट्रांसपोर्ट, सर्च एंड रेस्क्यू और एंटी सबमैरीन ऑपरेशंस में किया जा सकता है।

मल्टीफंक्शन स्क्रीन पर कंट्रोल पैनल सिस्टम

इसके अलावा इस हेलीकॉप्टर में परंपरागत मुश्किल डेशबोर्ड की बजाय खास मल्टीफंक्शन स्क्रीन पर कंट्रोल पैनल सिस्टम दिया गया है। वहीं इसका इंटीरियर काफी चौड़ा है और इसमें सामान रखने की काफी जगह है। वहीं ब्लैक हॉक की तरह इसकी नाक पर मिसाइल अप्रोच वार्निंग सिस्टम (MAWS) और SH-60B/F और MH-60R सीहॉक की तरह लैंडिंग गियर अरेंजमेंट सिस्टम दिया गया है, जिससे इसे छोटे डेक पर भी उतरने में आसानी होती है। वहीं इसकी टेल में यूएचफ कम्यूनिकेशन एंटिना और डायरेक्शनल डायरेक्ट लिंक एंटीना दिया गया है। चीन के दावे के मुताबिक इतनी खासियतों के साथ दुनिया का ऐसा कोई हेलीकॉप्टर मौजूद नहीं है, जो मल्टी-रोल कैपेबिलिटी के साथ आता हो।       

अकेला मल्टी-रोल कैपेबिलिटी वाला चॉपर  

एच-60 को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी की जरूरतों के मुताबिक भी तैयार किया गया है। फिलहाल चीनी नेवी के पास रूस में बना KA-28s, फ्रेंच सुपर फ्रेलोन पर आधारित Z-8/Z-18 जैसे लड़ाकु चॉपर हैं, लेकिन इनमें से कोई भी मल्टी-रोल कैपेबिलिटी वाला नहीं है। Z-20 में एंटी-आर्मर मिसाइल सिस्टम भी दिया गया है, जो टारपीडो और एंटी-शिप मिसाइल से जहाज की रक्षा कर सकता है।          

क्या है फ्लाई-बाई-वायर सिस्टम

इस सिस्टम में कई तरह की टेक्नोलॉजी शामिल होती हैं। जिनके जरिये जेट को उड़ाने में सहायक कंप्यूटर नियंत्रित इनपुट्स मिलते हैं। इस सेमी-ऑटोमैटिक टेक्नोलॉजी में कंप्यूटर कुछ अतिरिक्त गणनाएं करके पायलेट को भेजता है, जिससे उसे जहां को उड़ाने में आसानी होती है। साथ ही इसमें बैठा पायलेट कमांडर के तरह काम करता है और एयर फोर्स एवं जमीनी सेना से से समन्वय बना लेता है। लड़ाई या किसी बड़े ऑपरेशन के दौरान यह टेक्नोलॉजी बेहद कामयाब है।

पाकिस्तान ने इस तरह की मदद

वहीं 10 टन वाले Z-20 हेलीकॉप्टर में चीनी में ही निर्मित WZ-10 का इंजन लगा हुआ है। चीन का यह नया चॉपर चीन की सबसे एडवांस 20 सीरीज का हिस्सा है। स्टील्थ फाइटर जे-20, बड़े ट्रांसपोर्ट प्लेन वाई-20 और स्ट्रेटेजिक बॉम्बर एच-20 इस सीरीज का पहले से ही हिस्सा हैं। वहीं माना जा रहा है कि पाकिस्तान ने ही चीन को इस हेलीकॉप्टर का एक्सेस दिया था। 2011 में अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज ने जब अल-कायदा लीडर ओसामा बिन लादेन का मारने के लिए रेड की थी, तब उनका एक सीकोरस्काई यूएच-60 ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर क्रेश हो गया था।

BeiDou सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम

Z-20 और ब्लैक हॉक में अंतर केवल फाइव ब्लेड मेन रोटर, एंगुलर टेल-टू-फ्यूजलेज ज्वाइंट फ्रेम का है, साथ ही इसमें फ्लाई-बाई-वायर टेक्नोलॉजी दी गई है। साथ ही इसमें BeiDou सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम दिया गया है। ऐसा नहीं है कि चीन के पास सीकोरस्काई हेलीकॉप्टर्स नहीं है, बल्कि चीन ने 80 के दशक में अमेरिका से मीडियम लिफ्ट एस-70 सीरीज के 24 हेलीकॉप्टर खरीदे थे। वहीं चीनी एयरफोर्स ट्रांसपोर्ट टीम पूरी तरह से 90 के दशक में रूस में बने एमआई-17 हेलीकॉप्टर्स पर निर्भर है।     
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