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नेपाल के जरिये पैंतरेबाजी कर रहा चीन, इन दो फैसलों से अमेरिका-भारत को परेशान करने की तैयारी

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 17 Sep 2019 05:35 PM IST
KP Sharma Oli and Xi Jinping
KP Sharma Oli and Xi Jinping - फोटो : File Photo
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चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस साल अक्टूबर के मध्य में नेपाल का दौरा करने वाले हैं। इससे पहले उनके पूर्ववर्ती वेन जियाबाओ ने 2012 में चीन का दौरा किया था, जबकि 1996 में तत्कालीन चीनी राष्ट्रपति झियांग झेमिन ने नेपाल की यात्रा की थी। लेकिन इस बार चीन राष्ट्रपति की यात्रा से पहले काफी सतर्कता बरतते हुए किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहता। यहां तक कि यात्रा से पहले ही चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव को अंतिम रूप देने का फैसला कर लिया है। वहीं दूसरे फैसले ने अमेरिका समेत भारत की नींद उड़ा दी है।

कमल दहल 'प्रचंड' के बयान पर मचा बवाल

दरअसल सारा बवाल नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री तथा देश में सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के सह अध्यक्ष पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' के बयान पर हुआ है। चीनी विदेश मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति जारी कर कहा कि दहल ने अमेरिकी नेतृत्व वाली हिंद-प्रशांत रणनीति को नामंजूर कर दिया है। दहल ने चीनी विदेश मंत्री वांग यी की नेपाल यात्रा के दौरान बयान दिया था नेपाल वाशिंगटन से कंट्रोल होने वाली हिंद प्रशांत रणनीति का समर्थन नहीं करता है।

अमेरिका ने मांगा स्पष्टीकरण

दहल के इस बयान के बाद अमेरिकी विदेश मंत्रालय में बवंडर मच गया और काठमांडू स्थित अमेरिकी राजदूत रैडी बेरी नेपाल के विदेश सचिव शंकर दास वैरागी से मिलने पहुंचे और इस बयान पर स्पष्टीकरण मांगा। हालांकि दोनों पक्षों के बीच बंद कमरे में हुई बैठक के बारे में कुछ जानकारी तो नहीं मिली, लेकिन आधिकारिक तौर नेपाल विदेश मंत्रालय की तरफ से यही कहा गया कि नेपाल बेल्ट एंड रोड इनिशियेटिव और हिंद-प्रशांत रणनीति पर नेपाल के संचार मंत्री गोकुल बसकोटा के दिए बयान पर अडिग है। साथ ही, नेपाल अपने पड़ोसियों और अन्य मित्र देशों के साथ है और उनके साथ मित्रतापूर्ण व्यवहार रखता है।

नेपाल के विदेश मंत्री गए थे अमेरिका

वहीं नेपाल सरकारी तौर पर हिंद-प्रशांत रणनीति पर कुछ भी बोलने से बच रहा है। नेपाल चीन को दिखाना चाहता है कि वह अमेरिकी नेतृत्व का समर्थन नहीं करता है। हालांकि पिछले साल दिसंबर में नेपाली विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ज्ञवाली ने वाशिगंटन का दौरा कर अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो से मुलाकात कर अमेरिका की एशिया रणनीति खासतौर पर हिंद-प्रशांत रणनीति पर गहन चर्चा की थी।

हिंद प्रशांत रणनीति से रूकेगा चीन का विकास

हालांकि अमेरिका से वापस लौटने के बाद अमेरिका विदेश विभाग ने बयान जारी कर कहा था कि नेपाल अमेरिकी नेतृत्व वाली विस्तार नीति का हिस्सा है। वहीं ज्ञवाली ने हिंद प्रशांत रणनीति पर चुप्पी साध ली थी। चीनी विदेश मंत्रालय ने भी दहल का उल्लेख करते हुए कहा कि नेपाल मजबूती से गुटनिरपेक्ष नीति का पालन करता है, लेकिन चीन के विकास को रोकने वाली हिंद प्रशांत रणनीति को खारिज करता है।  

बीआरआई को साकार बनाने में जुटा नेपाल

हालांकि नेपाल कम्यूनिस्ट पार्टी के उपाध्यक्ष बिष्णु रिजाल का दहल के बयान पर कहना है कि चीनी विदेश मंत्री से उनकी बातचीत पार्टी के हालिया राजनीतिक घोषणा पत्र का हिस्सा है और उन्होंने पार्टी का पक्ष सामने रखा है न कि सरकार का। वह कहते हैं कि राजनीतिक दस्तावेज में  हमने स्पष्ट रूप से कहा है कि हमें दक्षिण चीन सागर में गतिविधियों से सावधान रहना होगा, मलक्का जलडमरूमध्य के आसपास की दिक्कतें और भारतीय एवं प्रशांत महासागरों में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति बढ़ रही है। चीन के नेतृत्व वाली बेल्ट एंड रोड परियोजना पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह कोई सैन्य गठबंधन नहीं है, बल्कि यह इसका हिस्सा रहे विभिन्न देशों के बीच पारस्परिक सहयोग को बढ़ावा देता है।

काठमांडू और तिब्बत सुरंग से जुड़ेंगे

खबरें है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की नेपाल यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौतों पर दस्तखत किए जाएंगे। नेपाल के उप प्रधानमंत्री ईश्वर पोखरियाल के मुताबिक इस दौरान चीनी राष्ट्रपति काठमांडू और तिब्बत के केरुंग को जोड़ने वाली झोर-गुर्जेभंज्यांग टनल का उद्घाटन भी करेंगे। तिब्बत के ऊपर ल्हासा तक पहुंची रेललाइन को बढ़ा कर काठमांडू तक लाए जाने की योजना है, जिसके लिए कई ब्रिज और सुरंगें बनाई जा रही हैं और इनका खर्च नेपाल उठा रहा है। खास बात यह है कि नेपाल के लिए चीन खरीदान नहीं है बल्कि चीन के लिए नेपाल खरीदार है। खतरा इस बात का है कि अगर ये रेललाइन काठमांडू से आगे पहुंच कर भारत के मुहाने पर आकर खड़ी हो जाती है, तो चीन के लिए भारत के रास्ते सीधे खुल जाएंगे और भारत के न चाहते हुए भी बेल्ट एंड रोड परियोजना का हिस्सा बन जाएगा।

भारत से सटे प्रवेश द्वारों को बंद करने की मांग

नेपाल में भारत के खिलाफ सियासत का माहौल गर्माता जा रहा है। सत्तारूढ़ नेपाल कम्यूनिस्ट पार्टी की सांसद पम्फा भुसालले ने तो भारत के साथ लगे सभी प्रवेश द्वारों को बंद करने की मांग की है। उनका आरोप है कि भारत लगातार नेपाल की सीमा का अतिक्रमण कर रहा है। वहीं उन्होंने दोनों देशों में सीमा में आने जाने वाले नागरिकों को पहचान पत्र जरूरी करने की मांग की है।

भारतीय गाड़ियों में लगेंगे जीपीएस

हाल ही में नेपाल ने फैसला किया है कि भारतीय पर्यटक वाहनों पर जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) लगाया जाएगा। नेपाल पर्यटन बोर्ड का कहना है कि जीपीएस से भारतीय एवं अन्य विदेशी पर्यटकों की सुरक्षा के साथ ही वाहनों की निगरानी हो सकेगी। पर्यटक वाहनों में जीपीएस नि:शुल्क लगाया जाएगा। सबसे अधिक पर्यटक सोनौली सीमा के रास्ते नेपाल आते हैं। जहां सरहद पर ही यातायात पुलिस जीपीएस लगा देगी। इससे नेपाल भ्रमण के दौरान उनके वाहन पर्यटन मंत्रालय की निगरानी में रहेंगे। वापसी के दौरान जीपीएस निकाल लिया जाएगा। भारत से नेपाल में हर दिन औसतन 300 पर्यटक वाहन आते हैं। छुट्टियों के दिनों में यह संख्या दोगुनी हो जाती है। भारतीय पर्यटक नेपाल के पोखरा, काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर व मुक्तिनाथ मंदिर आदि जाना पसंद करते हैं।  
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