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World: मिस्र की जलवायु बैठक में ब्रिटिश महाराजा नहीं होंगे शामिल, चीन में मनाई गांधी जयंती, पढ़ें अहम खबरें

एजेंसी, लंदन। Published by: Jeet Kumar Updated Mon, 03 Oct 2022 01:22 AM IST
सार

संडे टाइम्स अखबार की खबर के मुताबिक, प्रधानमंत्री लिज ट्रस ने एक बैठक में चार्ल्स से भाषण देने के लिए मिस्र नहीं जाने को कहा। सूत्रों ने बताया कि बैठक सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई और इसमें किसी तरह का विवाद नहीं हुआ। 

King Charles
King Charles - फोटो : Twitter
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विस्तार

ब्रिटिश महाराजा चार्ल्स अगले महीने मिस्र में होने वाली वैश्विक नेताओं की जलवायु परिवर्तन बैठक में शामिल नहीं होंगे। उनके करीबी सूत्र ने बताया कि नए महाराजा अपनी पुरानी प्रचार संबंधी भूमिका से पीछे हट रहे हैं।



बकिंघम पैलेस ने संयुक्त राष्ट्र की सीओपी27 के बारे में ब्रिटिश सरकार से सलाह मांगी थी। संडे टाइम्स अखबार की खबर के मुताबिक, प्रधानमंत्री लिज ट्रस ने एक बैठक में चार्ल्स से भाषण देने के लिए मिस्र नहीं जाने को कहा। सूत्रों ने बताया कि बैठक सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई और इसमें किसी तरह का विवाद नहीं हुआ। 


इसके बाद सर्वसम्मति बन गई कि चार्ल्स के लिए व्यक्तिगत रूप से वहां जाना ठीक नहीं होगा। महाराजा के रूप में चार्ल्स का यह पहला विदेशी दौरा होता। 2021 में ग्लासगोव में हुई सीओपी26 बैठक के उद्घाटन के दौरान चार्ल्स ने संबोधित किया था। 

चीन में दो साल बाद मनाया गया गांधी जयंती का उत्सव
चीन के सुरम्य चाओयांग पार्क में गांधी जयंती का उत्सव दो साल बाद मनाया गया। इससे पहले कोविड संबंधी पाबंदियों के कारण इसका आयोजन नहीं हो पाया था। चीन के स्कूली बच्चों के उनके प्रसिद्ध वक्तव्यों के उच्चारण और भारतीय मूल के लोगों के उनके भजनों के गायन से पार्क गुंजायमान हो उठा।

बीजिंग के झील किनारे स्थित इस पार्क में 2005 में मशहूर कलाकार युआन शीकुन के गांधी प्रतिमा स्थापित करने के बाद से हर साल यहां बापू की जयंती मनाई जाती है। पार्क में स्थापित गांधी प्रतिमा अलग तरह की है। इसमें बापू बैठकर किताब पढ़ते दिखते हैं। शांत और सुरम्य वातावरण में लोग गांधी को श्रद्धांजलि देने के लिए उमड़ते हैं। 

युआन ने गांधी के अलावा भी मशहूर चीनी हस्तियों और विश्व नेताओं की प्रतिमाएं बनाई हैं। सत्ताधारी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी में युआन के अच्छे संपर्क हैं। चाओयांग पार्क में स्थित जिन ताई कला संग्रहालय के वह काफी समय से अध्यक्ष हैं। 
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बुर्किना फासो में प्रदर्शनकारियों का फ्रांसीसी दूतावास पर हमला
पश्चिम अफ्रीकी देश बुर्किना फासो की राजधानी औगाडोउगोउ में गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने फ्रांसीसी दूतावास पर हमला कर दिया। देश में तख्तापलट करने वाले नए नेता कैप्टन इब्राहिम त्राओरे के समर्थकों ने फ्रांस पर सत्ता से बेदखल किए अंतरिम राष्ट्रपति लेफ्टिनेंट कर्नल पॉल हेनरी सैंडाओगो डामिबा को पनाह देने का आरोप लगाया है।  

वहीं, फ्रांसीसी प्राधिकारियों ने इस आरोप को खारिज किया है। सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो में निवासियों को फ्रांसीसी दूतावास के पास जलती हुई मशालें लेकर देखा गया और अन्य तस्वीरों में परिसर में आग की लपटें उठती हुई देखी गईं। बुर्किना फासो के दूसरे सबसे बड़े शहर बोबो दियोलासो में गुस्साई भीड़ ने एक फ्रांसीसी संस्थान में भी तोड़फोड़ की। डामिबा का अभी कुछ पता नहीं चल पाया है। 

फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने कड़े शब्दों में एक बयान जारी कर कहा, हम बुर्किना फासो में हुए घटनाक्रम में संलिप्तता से औपचारिक रूप से इनकार करते हैं। जिस अड्डे पर फ्रांसीसी सेना है, वहां कभी पॉल हेनरी सैंडाओगो डामिबा नहीं रहे। 

वहीं, फ्रांस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता एनी क्लेयर लेजेंद्रे ने शनिवार रात को फ्रांस-24 से कहा कि औगाडोउगोउ में भ्रम की स्थिति है और उन्होंने फ्रांसीसी नागरिकों से घर पर ही रहने का अनुरोध किया।

नेपाल हिमस्खलन की चपेट में आया माउंट मानसलू बेस कैंप
नेपाल का माउंट मानसलू में बेस कैंप में रविवार को भीषण हिमस्खलन हुआ। कई पर्वतारोही लापता बताए जा रहे हैं। इस घटना की पुष्टि ताशी शेरपा ने की जो दुनिया की जो 8,163 मीटर की ऊंचाई पर सबसे ऊंची चोटी पर चढ़ने की कोशिश कर रहे थे।

ताशी द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में बेस कैंप की ओर हिमस्खलन का भयानक मंजर देखा गया है। उन्होंने कहा कि हिमस्खलन में तीन दर्जन से अधिक बेस कैंप कैंप नष्ट हो गए थे। हालांकि, इसमें कोई पर्वतारोही घायल नहीं हुआ है। 

नेपाल के पर्यटन विभाग के अनुसार, 26 सितंबर को कैंप 4 के ठीक नीचे हिमस्खलन के बाद एक दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए थे, इसमें एक भारतीय भी शामिल था। कुछ दिन पहले भी पहाड़ में हिमस्खलन हुआ था। पर्यटन विभाग की ओर से इस साल मनास्लू पर चढ़ने के लिए 400 से अधिक परमिट जारी किए गए थे। 

हालांकि, बर्फबारी के कारण रास्ते पूरी तरह से खराब हो गए और कई नए रास्तों पर बर्फ भी जम गई थी। जिससे फिसलन काफी ज्यादा बढ़ गई। हिमस्खलन के बाद कई लोग लापता हैं जिनकी तलाश में सर्च अभियान जारी है।

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