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BBIN को है बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना का इंतजार, अक्टूबर में आ सकती हैं भारत

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Thu, 12 Sep 2019 12:40 PM IST
शेख हसीना
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खास बातें

  • अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद बांग्लादेश ने भारत का किया था समर्थन
  • विदेश मंत्री एस जयशंकर की थी पहली विदेश यात्रा
  • बीबीआईएन में शामिल हैं यानी बांग्लादेश, भूटान, भारत और नेपाल
  • 2015 में थिपूं में बीबीआईएन मोटर वाहन समझौता पर हुए थे दस्तखत
  • एक-दूसरे के राजमार्गों का यात्री वाहन, व्यक्तिगत और माल ढुलाई वाहनों का आवाजाही के लिए कर सकेंगे इस्तेमाल
  • बीबीआईएन है चीन की वन बेल्ट वन रोड परियोजना का तोड़
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद बांग्लादेश ने इसे भारत सरकार का आंतरिक मामला बताते हुए इसका समर्थन किया था। इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपनी पहली विदेश यात्रा के दौरान बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना से मुलाकात कर मेजबानी की इच्छा जताई थी। शेख हसीना की अक्टूबर के पहले हफ्ते में भारत की यात्रा प्रस्तावित है और इस दौरान सबसे अहम बीबीआईएन कनेक्ट्विटी पर चर्चा की जाएगी।

तीस्ता जल विवाद

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को तीस्ता जल विवाद पर भारत से सकारात्मक रवैये की उम्मीद है। हसीना अक्टूबर की शुरुआत में भारत दौरे पर आने वाली हैं। हसीना ने बुधवार को संसद में कहा कि भारत के साथ करीब 22 साल से चले आ रहे तीस्ता जल विवाद को सकारात्मक तरीके से जल्द ही सुलझा लिया जाएगा। शेख हसीना ने कहा कि हमें आशा है कि दो देशों के बीच चले आ रहे अनसुलझे विवादों को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा। उम्मीद करते हैं कि मेरे दौरे से पहले भारत की ओर से सभी अनसुलझे विवादों पर अपना सकारात्मकता देखने को मिलेगी।

क्या है बीबीआईएन कनेक्ट्विटी

प्रस्तावित यात्रा से पहले पिछले हफ्ते ढाका में बीबीआईएन यानी बांग्लादेश, भूटान, भारत और नेपाल कनेक्टिविटी को लेकर गंभीरता से चर्चा की गई। हसीना की भारत यात्रा से इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पंख लगने की उम्मीद जताई जा रही है। 2015 में इसमें शामिल सभी देशों ने थिपूं में बीबीआईएन मोटर वाहन समझौता पर दस्तखत किए थे। इस समझौते के तहत शामिल देशों में यात्री वाहन, व्यक्तिगत और माल ढुलाई वाहनों की आवाजाही के लिए एक-दूसरे के राजमार्गों का इस्तेमाल कर सकेंगे।

भारत की पहल पर शुरू हुई योजना

चीन की वन बेल्ट वन रोड के जवाब में भारत ने इस योजना का प्रस्ताव रखा था और भारत इस योजना का संस्थापक सदस्य भी है, वहीं एशियाई विकास बैंक (एडीबी) इस प्रोजक्ट को वित्तीय मदद दे रहा है। अगर यह योजना परवान चढ़ती है, तो इन देशों में सड़क मार्ग से यात्रा करना सुगम हो जाएगा, वहीं बंगाल की खाड़ी में शांति बहाली की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।
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ग्लोबल पब्लिक पॉलिसी रिसर्च ग्रुप, कट्स इंटरनेशनल के कार्यकारी निदेशक बिपुल चटर्जी का कहना है कि बीबीआईएन मोटर वाहन समझौता से इन देशों की अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से फायदा मिलेगा। साथ ही इस पहल से इन देशों के लोगों, व्यापार और सरकार के मध्य वित्तीय और डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ेगी, जो इनकी आर्थिक क्षमता को बढ़ाने का काम करेगी।  

अगले साल 2020 से होगी चालू

उम्मीद जताई जा रही है कि बीबीआईएन योजना की शुरुआत अगले साल 2020 से हो जाएगी। बांग्लादेश के उन्नयन शमनय संगठन के चेयरमैन अतिउर रहमान का कहना है कि बांग्लादेश शुरू से ही खुले क्षेत्रवाद के पक्ष में रहा है और इन देशों की सरकारों के बीच वर्तमान राजनीतिक समीकरण बीबीआईएन मोटर वाहन समझौते के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए अनुकूल हैं।

राह में हैं कई अवरोध

वहीं बीबीआईएन के सपने के पूरा करने में अभी भी कई अवरोध हैं। हालांकि इस समझौते पर दस्तखत भूंटान की राजधानी थिपूं में ही हुए थे, लेकिन सदस्य देश होने के बावजूद भूटान इसके क्रियान्वयन को लेकर असमर्थता जता चुका है। भूटान का कहना है कि अन्य सदस्य देशों को उसके बिना ही इस समझौते पर आगे बढ़ना चाहिए। भूटान ने अंदरूनी प्रक्रियाओं और चिंताओं का हवाला देते हुए इसके अनुमोदन को लेकर और समय मांगा था। भूटान में विपक्ष की चिंता थी कि भूटान ‘जीरो’ कार्बन देश है और मालवाहक कॉरिडोर बनने के बाद ट्रकों की आवाजाही बढ़ेगी, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ेगा और पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा। दरअसल, भूटान की उच्च संसद इस समझौते को पास करने में नाकाम रही थी।  

चीन की वन बेल्ट वन रोड का है तोड़

अगर यह योजना अमल में आती है, तो चीन की महत्वाकांक्षी वन बेल्ट वन रोड परियोजना को धक्का जरूर लगेगा। चीन अब बड़े जोरशोर से विस्तारवादी पहल को बढ़ावा दे रहा है और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस साल अक्टूबर के मध्य में नेपाल का दौरा करने वाले हैं। चीन भी नेपाल के साथ बड़े स्तर पर सड़क मार्ग स्थापित करने का पक्षधर है और नेपाल के साथ अपने व्यावसायिक हित रखता है।

चीन की इस कूटनीति के जवाब में भारत सड़क संपर्क की रणनीति अपना रहा है। हालांकि भारत इससे पहले भी कई साल पहले भूटान, नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार को जोड़ने के लिए सासेक (साउथ एशियन सब रिजनल इकोनॉमिक को-ऑपरेशन) कॉरिडोर शुरू किया था, जिसे पूर्वी एशियाई बाजार के लिए भारत का प्रवेश द्वार कहा जाता है।

भारत के लिए मुनाफे का सौदा

भारत ने बीबीआईएन को अमली जामा पहनाना भी शुरू कर दिया है और इन देशों से सटे राज्यों में सड़क उन्नतिकरण का काम शुरू किया जा चुका है, जिसमें राष्ट्रीय राजमार्ग एक भी शामिल है। इसके अलावा आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति मणिपुर में 1630.29 करोड़ रुपये की लागत से एनएच-39 के 65 किलोमीटर लंबे इम्फाल-मोरेह सेक्शन को उन्नत तथा चौड़ा बनाने के कार्यक्रम को मंजूरी दे चुकी है। परियोजना शुरू होने से आने-जाने की अवधि में 40 फीसदी की कमी आयेगी, साथ ही बेहतर सड़क और आने-जाने की कम अवधि से ईंधन लागत में भी बचत होगी।
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