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तालिबान के साथ अमेरिका ने किया आंशिक संघर्षविराम, बढ़ सकती हैं भारत की मुश्किलें, जानिए कैसे

प्रियेश मिश्र, नई दिल्ली Updated Sat, 22 Feb 2020 09:08 AM IST
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तालिबान
तालिबान - फोटो : सोशल मीडिया
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अमेरिका और तालिबान के बीच संघर्ष पर विराम लगने के साथ ही अफगानिस्तान में शांति की उम्मीद की जा रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने ट्वीट कर कहा है कि लंबे समय के बाद तालिबान के साथ बात बन गई है। इससे अफगानिस्तान में हिंसा रुक सकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अफगानिस्तान में हिंसा रोकने के लिए एक समझौते पर अमेरिका 29 फरवरी को हस्ताक्षर करने की तैयारी कर रहा है।
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वार्ता सफल होने पर बढ़ सकती हैं भारत की मुश्किलें

अमेरिका और तालिबान के बीच शांति वार्ता के सफल होने से भारत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। भू राजनैतिक रूप से अहम अफगानिस्तान में तालिबान के कदम पसारने से वहां की नवनिर्वाचित सरकार को खतरा होगा और भारत की कई विकास परियोजनाएं प्रभावित होंगी। इसके अलावा भी पश्चिम एशिया में पांव पसारने की तैयारी में लगी मोदी सरकार को बड़ा नुकसान होगा।

22 फरवरी से आंशिक संघर्ष विराम शुरू

अफगानिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रवक्ता जावेद फैसल ने भी कहा है कि अफगान सुरक्षा बलों और अमेरिका व तालिबान के बीच हिंसा में कमी जल्द ही हो जाएगी। उन्होंने शनिवार 22 फरवरी से हिंसा में कमी आने का दावा करते हुए कहा कि यह कमी एक सप्ताह तक जारी रहेगी। उन्होंने माना कि हिंसा के पूरी तरह खत्म होने में समय लगेगा। आंशिक संघर्ष विराम शनिवार से शुरू होगा।

तालिबान-अमेरिका शांति वार्ता पाकिस्तान के लिए फायदे का सौदा

तालिबान के साथ अमेरिका की शांति वार्ता पाकिस्तान के लिए एक फायदे का सौदा है। इसलिए इन दोनों ध्रुवों के बीच पाकिस्तानी सरकार और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई बिचौलिए का काम कर रही है। अफगानिस्तान से अमेरिकी फौजों के वापस जाते ही पाकिस्तान तालिबान की मदद से कश्मीर में आतंकी घटनाओं को अंजाम दे सकता है।

तालिबान को अमेरिका के साथ बातचीत की मेज पर पाकिस्तान ही लेकर आया क्योंकि वह अपने पड़ोस से अमेरिकी फौजों की जल्द वापसी चाहता है। कतर की राजधानी दोहा में हो रही अमेरिका-तालिबान वार्ता में शामिल होने के लिए पाकिस्तान ने कुछ महीने पहले ही तालिबान के उप संस्थापक मुल्ला बारादर को जेल से रिहा किया था।

अगर अफगानिस्तान में तालिबान की जड़ें मजबूत होती हैं तो वहां की सरकार को हटाने के लिए पाकिस्तान तालिबान को सैन्य साजो-सामान मुहैया करा सकता है। क्योंकि, अफगानिस्तान की वर्तमान सरकार के साथ पाकिस्तान के संबंध सही नहीं है।
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अफगानिस्तान में चल रही भारत की कई परियोजनाओं को खतरा

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