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आखिरकार सुलझ गया मिस्त्र के रेगिस्तानी कांच का 100 साल पुराना रहस्य

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Thu, 16 May 2019 05:30 PM IST
मिस्त्र के रेगिस्तान का कांच
मिस्त्र के रेगिस्तान का कांच - फोटो : ब्रिटिश म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री, लंदन
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मिस्त्र (इजिप्ट) के रेगिस्तान में मिले कांच की उत्पत्ति का करीब 100 साल पुराना रहस्य वैज्ञानिकों ने सुलझा लिया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक इस कांच का निर्माण किसी वायुमंडलीय घटना से नहीं बल्कि उल्का पिंड के प्रभाव से हुआ था। जर्नल जियोलॉजी में प्रकाशित निष्कर्ष क्षुद्रग्रहों द्वारा उत्पन्न खतरे को समझने के लिए हैं। 
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ऑस्ट्रेलिया में कर्टिन विश्वविद्यालय के शोधार्थियों ने जिरकॉन (मिनरल) के छोटे-छोटे दानों की लीबिया के रेगिस्तान में मिले कांच के नमूनों के रूप में जांच की। इनका निर्माण करीब 2.9 करोड़ साल पहले हुआ था और पश्चिमी मिस्त्र के कई हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में पाए जाते हैं। 

कर्टिन विश्वविद्यालय के आरोन कैवोसी कहते हैं कि कांच में मौजूद जिरकॉन एक उच्च दबाव वाले खनिज की पूर्व उपस्थिति का सबूत देते हैं जिसका नाम रीडाइट है, जो केवल उल्का पिंड प्रभाव के दौरान बनता है।

कैवोसी ने कहा, 'यह बहस का विषय है कि कांच का निर्माण उल्का पिंड के प्रभाव से हुआ या एयरबर्स्ट से, जो तब होता है, जब क्षुद्र ग्रह (एस्टरॉयड) जिसे नियर अर्थ ऑब्जेक्ट्स कहा जाता है, वह फट जाता है और पृथ्वी के वातावरण में ऊर्जा जमा करता है।'

उन्होंने कहा, 'उल्का पिंड के प्रभाव और एयरबर्स्ट दोनों से पिघलने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है, लेकिन केवल उल्का पिंड के प्रभाव से ही कंपन लहरें उत्पन्न होती हैं जिससे उच्च दबाव वाले मिनरल का निर्माण होता है, इसलिए पूर्व रीडाइट के सबूत इस बात को प्रमाणित करते हैं कि यह उल्का पिंड के प्रभाव से हि निर्मित हुआ था।'

कैवोसी ने कहा कि यह विचार कि कांच का निर्माण एक बड़े वायुमंडलीय एयरबर्स्ट के दौरान हुआ हो सकता है, तब लोकप्रिय हुआ जब रूस में साल 2013 में एक नाटकीय एयरबर्स्ट हुआ जिससे बड़े स्तर पर संपत्ति की छति हुई और लोग घायल हुए, लेकिन यह सतह की सामग्री को पिघलाने का कारण नहीं बना।

कैवोसी कहते हैं कि पूर्व के मॉडल इस ओर इशारा करते हैं कि लीबियाई रेगिस्तान के कांच करीब 100 मेगाटन के एयरबर्स्ट को उल्लेखित करते हैं, लेकिन हमारे परिणाम बताते हैं कि ऐसा नहीं है। उल्कापिंड के प्रभाव भयावह घटनाएं हैं, लेकिन वे आम नहीं हैं।'

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