ऑस्ट्रिया ने टीका न लगवाने वालों को सार्वजनिक स्थलों से बाहर रखने का फैसला किया है। पांच दिसंबर को ही यह देश लॉकडाउन से बाहर आया था। प्रतिबंधों में ढील दी गई है लेकिन टीकाकरण को लेकर सख्ती जारी है।
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जर्मनी में कोरोना टीका न लगवाने वाले लोगों को घर से निकलने की अनुमति केवल काम पर, स्कूल जाने के लिए या आपात स्थिति में ही दी जा रही है। इसे लेकर यहां एक कानून भी लाया जा सकता है।
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टीकाकरण को पहले ही अनिवार्य कर चुकी इंडोनेशिया सरकार ने जकार्ता में टीका न लगवाने पर भारी जुर्माना लगाने की चेतावनी भी दी है। ऐसे लोगों को मिलने वाली सरकारी मदद पर भी रोक लगाई जा सकती है।
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ग्रीस ने इस साल की शुरुआत में 60 वर्ष से अधिक आयु वाले लोगों के लिए टीका अनिवार्य कर दिया था। टीका न लगवाने वाले व्यक्ति पर 100 यूरो (8000 रुपये) का मासिक जुर्माना लगाने का फैसला लिया गया है।
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सऊदी अरब में मई में ही सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के लिए टीकाकरण अनिवार्य कर दिया गया था। यहां पर लोगों को किसी सरकारी या शिक्षण संस्थान में जाने के लिए भी टीकाकरण को आवश्यक किया गया है।
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कनाडा ने अक्तूबर से टीका नहीं लगवाने वाले केंद्रीय कर्मचारियों को बिना तनख्वाह के छुट्टी पर भेजना शुरू कर दिया था। 22 नवंबर के बाद से 338 सांसदों के लिए भी कोरोना वैक्सीन को अनिवार्य कर दिया गया है।
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अमेरिका में 10 सितंबर से केंद्र सरकार से जुड़े सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए टीकाकरण अनिवार्य है। निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को या तो हर हफ्ते जांच करानी होगी या चार जनवरी तक टीकाकरण कराना होगा।
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रूस की राजधानी मॉस्को में सरकारी कर्मचारियों के लिए टीकाकरण जरूरी है। इसके अलावा सेंट पीटर्सबर्ग ने भी 60 साल से ऊपर और किसी बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए नौ नवंबर से टीकाकरण अनिवार्य किया है।