अमर उजाला
Sat, 25 March 2023
मुराद पूरी होने पर भक्त देवी मंदिर में घंटा चढ़ाते हैं। इस मंदिर में अब तक एक लाख से अधिक घंटे चढ़ाए जा चुके हैं।
मंदिर के पुजारी रविंद्र मोहन गर्ग ने बताया कि वर्ष 1969 में यहां मकान की नींव रखी जा रही थी तो मकान मालिक की पत्नी के सपने में देवी मां आईं
सपने में देवी ने मकान के पास पहले मंदिर निर्माण की बात कही। देवी मां की इच्छा पूरी करने के लिए दुर्गा मां का मंदिर बनवाया गया।
मंदिर में एक ही दिन में 84 घंटे चढ़ाए गए, जिसके कारण मंदिर का नाम 84 घंटा मंदिर पड़ा।
चौरासी घंटा मंदिर की पहली आरती सुबह पांच बजे होती है। शाम की आरती सात बजे कराई जाती है।
सेटेलाइट चौराहे से ऑटो करके चौपुला पर उतरना होगा। इसके बाद वहां से करगैना के लिए ऑटो करना होगा। रास्ते में 84 घंटा मंदिर पड़ेगा।
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