अमर उजाला
Wed, 29 June 2022
प्रयागराज का एक परिवार 18 वर्षीय बेटी के शव के साथ पांच दिन तक घर में बंद रहा। बदबू आने पर ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी तो घटना की जानकारी हुई। घर में 11 अन्य सदस्य भी बीमार पड़े मिले।
जांच में पता चला कि घर में कई दिनों तक खाना नहीं बनता था और परिवार के लोग सिर्फ गंगाजल पीते थे। पुलिस अफसर परिजनों की हालत देख और यह सब जानकर दंग रह गए।
परिवार बीते डेढ़ साल से रिश्तेदार व आस-पास के लोगों से कोई मतलब नहीं रखता था। उनके पास खेत है लेकिन दो साल से खेती नहीं की जा रही है। परिवार के कुछ लोग रोज गंगा स्नान कर जल लाते थे।
एक और चौंकाने वाली बात यह है कि वह घर में अंदर जाने के लिए दरवाजे की जगह खिड़की का इस्तेमाल किया करते थे। परिवार किसी देवी की पूजा करता था और उन्हीं के नाम पर झाड़-फूंक किया करता था।
चौथी बेटी बीनू शादी के बाद से ही बीमार थी और उसी का घर के अंदर ही इलाज किया जा रहा था। इसी चक्कर में उसकी मौत हो गई थी।
चौंकाने वाली बात यह है कि परिवार पढ़ा लिखा है। अभयराज के सभी बच्चे ग्रेजुएशन कर चुके हैं। ऐसे में सभी हैरान हैं कि परिवार अंधविश्वास के फेर में आखिर कैसे फंस गया।
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