AI और AGI के बाद अब टेक्नोलॉजी की इस नई ताकत का खतरा
अमर उजाला
Thu, 16 May 2024
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हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में कदम रख चुके हैं। जनरेटिव एआई तकनीक आने के बाद साइंटिफिक रिसर्च से लेकर...
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कंटेंट क्रिएशन और ऑटोमेशन की दुनिया में कई बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं
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हालांकि, आज के समय के एआई की कार्यक्षमता काफी सीमित है। वह केवल एक क्षेत्र तक ही सीमित है। उदाहरण के तौर पर चैटजीपीटी आपसे केवल टैक्स्ट के जरिए ही बात कर सकता है
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मिडजर्नी केवल इमेज जनरेशन कर सकता है, सोरा केवल वीडियो बना सकता है। गौर करने वाली बात है कि अभी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को इंसानों की तरह कार्य करने की क्षमता हासिल नहीं हुई है
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ओपनएआई, गूगल जैसी कई बड़ी टेक कंपनियां एक ऐसी तकनीक को बनाने की दौड़ में लगी हुई हैं जो कि हुबहू इंसानों की तरह सोच समझकर इंसानों जैसे काम करने की क्षमता रखती हो
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इंसानों की तरह काम करने वाली तकनीक को आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस की संज्ञा दी गई है। हालांकि, एआई की उन्नति की दौड़ में एक ऐसी भी तकनीक है, जिसको लेकर कई बड़े दिग्गज काफी चिंतित हैं
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस के बाद की इस तकनीक को आर्टिफिशियल सुपर इंटेलिजेंस का नाम दिया गया है
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आर्टिफिशियल सुपर इंटेलिजेंस एआई का वह उन्नत स्वरूप है जो कि इंसानों की बुद्धिमत्ता से भी आगे की चीज है
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आर्टिफिशियल सुपर इंटेलिजेंस के पास इंसानों से भी बेहतर कॉग्नेटिव क्षमताएं और विचार विमार्श करने का कौशल होगा
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खैर आर्टिफिशियल सुपर इंटेलिजेंस का अस्तित्व अभी परिकल्पनाओं में है। अगर भविष्य में इस तकनीक को विकसित करने में सफलता मिलती है तो इंसानी अस्तित्व पर भी कई सवाल खड़ हो सकते हैं
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