रजिस्ट्री करने से पहले संपत्ति की मार्केट वैल्यू को निर्धारित किया जाता है। मार्केट वैल्यू को क्रेता और विक्रेता तय करते हैं
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इसके बाद स्टाम्प पेपर को खरीदा जाता है। इसमें बैनामा टाइप होता है
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इस प्रक्रिया के बाद रजिस्ट्रेशन कराया जाता है। इसके बाद रजिस्ट्रेशन नंबर मिलता है। इसी के जरिए रजिस्ट्री कराई जाती है
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रजिस्ट्री करवाते समय दो गवाहों की जरूरत भी पड़ती है। इस दौरान दोनों पार्टियों के जमीन से जुड़े दस्तावेजों के साथ पहचान संबंधित कागजात भी दिए जाते हैं
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इस प्रक्रिया के पूरे होने के बाद रजिस्ट्रार कार्यलय से एक पर्ची मिलती है। यह पर्ची काफी जरूरी होती है। यह पर्ची इस बात का सबूत होती है कि आपकी रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है
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