अमर उजाला
Mon, 17 July 2023
हम हर रोज व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इमोजी का खूब इस्तेमाल करते हैं। 2023 में इमोजी हर जगह हैं।
जापान के इंजीनियर शिगेताका कुरीता ने कम शब्दों की समस्या को सुलझाने के लिए साल 1999 में इमोजी की खोज की थी।
शिगेताका कुरीता ने सबसे पहले इमोजी के 176 सेट तैयार किए थे, जो छोटे-छोटे डॉट के रूप में थे। इसी समय इमोजी भेजने की शुरुआत हुई।
बता दें कि पहली बार 1982 में कंप्यूटर वैज्ञानिक स्कॉट फहलमैन ने सुझाव दिया था कि :-) और :-( सिम्बॉल भाषा को रिप्लेस कर सकते हैं।
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