क्यूआर कोड के जरिए लोगों के साथ साइबर फ्रॉड किया जाता है। हैकर्स क्यूआर कोड के जरिए फिशिंग अभियान चलाते हैं।
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फ्रॉड करने वाले क्यूआर कोड में अपनी कंडीशनिंग को जोड़ देते हैं। इसमें अलग-अलग टेंप्लेट होती है, जिसके जरिए स्कैम होता है।
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क्यूआर कोड से सिंगल लोगों को कंपनियों को निशाना बनाया जाता है।
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साइबर स्कैमर्स फिशिंग अटैक के लिए ऑथेंटिकेशन अपडेट का सहारा लेते हैं। अपराधी इसके लिए ईमेल की मदद लेते हैं।
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इस तरह के ईमेल में अक्सर फर्जी तौर पर किसी कंपनी के लोगो का इस्तेमाल होता है।
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क्यूआर कोड स्कैम में फ्रॉड करने वाले लोगों से उनकी जानकारी ले लेते हैं। स्कैमर्स लोगों को नकली ईमेल, लोगो और कंपनी की सहायता से जल्दी में ईमेल को अपडेट करने के लिए कहते हैं।
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फ्रॉड द्वारा भेजे गए क्यूआर कोड को जैसे ही मैसेज में खोलते हैं, तभी यूजर की सारी जानकारी स्कैमर्स के पास पहुंच. जाती है।
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ऐसे में मैसेज में कभी भी जल्दी से कोई काम करने को कहा जाए तो उससे सतर्क रहे। वरना यूजर्स को बड़ा नुकसान हो सकता है।
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क्यूआर कोड के किसी भी मैसेज को न खोलें और शिकार होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 से सहायता लें।