अमर उजाला
Thu, 27 February 2025
भारत में एआई तस्वीरों को लेकर फिलहाल कोई कानून नहीं है, लेकिन ब्रिटेन दुनिया का पहला है जो ऐसे AI टूल्स पर कानून बना रहा है जो बच्चों की यौन शोषण से जुड़ी तस्वीरें बनाने में इस्तेमाल होते हैं।
कुछ दिन पहले सरकार ने घोषणा की है कि ऐसे AI टूल्स का निर्माण, स्वामित्व या वितरण करना अब गैरकानूनी होगा और इसके लिए पांच साल तक की सजा हो सकती है।
AI टूल्स का इस्तेमाल असली तस्वीरों को "न्यूडिफाई" करने या बच्चों के चेहरे को अन्य छवियों पर लगाने के लिए किया जा रहा है, जिसे सरकार ने गंभीर अपराध माना है।
AI "पीडोफाइल मैनुअल्स" रखना भी अपराध होगा, जिसमें यह सिखाया जाता है कि AI के जरिए बच्चों का यौन शोषण कैसे किया जाए और इसके लिए तीन साल तक की सजा हो सकती है।
जो लोग ऐसे वेबसाइट्स चलाते हैं जहां बाल यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट साझा किया जाता है या बच्चों को फंसाने की सलाह दी जाती है, उन्हें 10 साल तक की जेल हो सकती है।
गृह सचिव यवेट कूपर ने इसे "बेहद गंभीर समस्या" बताते हुए कहा कि AI के कारण बच्चों और किशोरों के खिलाफ ऑनलाइन शोषण तेजी से बढ़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि अन्य देश अभी तक ऐसे कानून नहीं बना रहे हैं, लेकिन उम्मीद है कि वे भी इस दिशा में कदम उठाएंगे।
इंटरनेट वॉच फाउंडेशन (IWF) ने 2024 में 30 दिनों के भीतर एक डार्क वेब साइट पर 3,512 AI-जनित बाल यौन शोषण की तस्वीरें पाई, जिससे इस बढ़ती समस्या का पता चलता है
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