अमर उजाला
Mon, 23 December 2024
वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन में यह पाया है कि आने वाले समय में रोबोट सिर्फ त्वचा को छूकर इंसानों की भावनाओं को समझ सकेंगे।
यह तकनीक त्वचा चालकता पर आधारित है, जो त्वचा द्वारा बिजली को संचालित करने की क्षमता है।
चेहरे की अभिव्यक्ति और आवाज के माध्यम से भावनाएं पहचानने वाली तकनीकों की तुलना में, त्वचा चालकता एक सटीक और गैर-हानिकारक तरीका प्रदान करती है।
इस अध्ययन में 33 प्रतिभागियों को भावनात्मक वीडियो दिखाए गए और उनकी त्वचा चालकता को मापा गया।
अध्ययन में पाया गया कि डर की प्रतिक्रिया सबसे लंबी होती है, जबकि हास्य से तेज लेकिन क्षणिक प्रतिक्रियाएं मिलती हैं।
परिवार के भावनात्मक जुड़ाव, खुशी और दुख का मिश्रण, धीमी प्रतिक्रियाएं दिखाते हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तकनीक को दिल की धड़कन और मस्तिष्क की गतिविधि जैसे अन्य मापदंडों के साथ मिलाकर और अधिक सटीक बनाया जा सकता है।
इस तकनीक की मदद से किसी व्यक्ति के शारीरिक संकेतों के आधार पर उसकी भावनाओं और अनुभवों को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।
यह अध्ययन इस ओर इशारा करता है कि भविष्य के रोबोट केवल बातचीत ही नहीं करेंगे, बल्कि इंसानों की भावनाओं को समझकर सहानुभूति भी व्यक्त कर सकेंगे।
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