अमर उजाला
Wed, 29 October 2025
AI टूल्स अब इंसानों से ज्यादा तेजी और सटीकता से काम कर रहे हैं। कोडिंग, टीचिंग, कस्टमर सपोर्ट और पत्रकारिता समेत यह कई तरह की नौकरियों को खतरे में डाल सकता है।
गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक AI से दुनियाभर में 30 करोड़ नौकरियों पर असर पड़ सकता है। खासतौर पर मार्केटिंग, फाइनेंस, हेल्थकेयर और मीडिया सेक्टर में।
इसके वजह से अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या AI के दौर में यदि नौकरी गई तो क्या यूनिवर्सल बेसिक इनकम (UBI) सहारा बन सकता है?
सैम ऑल्टमैन और एलन मस्क जैसे टेक लीडर्स UBI की वकालत की है और इसे आने वाली बेरोजगारी का समाधान बताया है।
फिनलैंड, कनाडा और अमेरिका में UBI पर प्रयोग हो चुके हैं। शुरुआती नतीजों में इससे लोगों की आर्थिक सुरक्षा बढ़ी है और तनाव घटा है।
इसे बड़े स्तर पर लागू करने के लिए सरकारें डिजिटल करेंसी पर काम कर रही हैं। यह डिजिटल मुद्रा होती है जिसे सरकार नियंत्रित कर सकती है।
भारत में भी डिजिटल रुपया (CBDC) लॉन्च हो चुका है। यह सामान्य रुपये जैसा ही है, बस डिजिटल रूप में। इसे नकद की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।
UBI पूरी तरह नया विचार नहीं है लेकिन जैसे-जैसे AI और ऑटोमेशन देश की नौकरियों पर असर डालेंगे, इसकी चर्चा और तेज हो सकती है।
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