अमर उजाला
Tue, 15 April 2025
AI सर्च से हमें सर सवाल का सटीक जवाब मिल रहा है। कई मामलों में तो एआई ने गूगल को भी पीछे छोड़ दिया है।
लेकिन गूगल या AI से पूछे गए हर सवाल के लिए पृथ्वी को उसकी कीमत चुकानी पड़ रही है।
हम जितना ऑनलाइन सर्च करते हैं उतना धरती को नुकसान पहुंचता है।
Google के मुताबिक, एक गूगल सर्च करने पर 0.2 ग्राम CO₂ का उत्सर्जन होता है।
वहीं, एआई आधारित सर्च से 4 से 6 ग्राम तक CO₂ का एमिशन होता है। हर दिन गूगल पर 8 अरब से ज्यादा सर्च होती हैं।
गूगल और AI टूल्स को सर्च इंजन चलाने के लिए बड़े-बड़े सर्वर बनाने पड़ते हैं।
ये सर्वर हर दिन लगभग उतनी बिजली की खपत कर देते हैं जितना एक छोटे शहर को जरूरत होती है।
इसके साथ ही सर्वर को ठंडा रखने के लिए बड़ी मात्रा में पानी की भी जरूरत होती है, जो भू जल स्तर को कम कर रहा है।
गूगल ही नहीं, मेटा, फेसबुक, व्हाट्सएप जैसी तमाम सर्विसेज को जारी रखने में बड़ी मात्रा में CO₂ का उत्सर्जन होता है।
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