साइबर अपराधी लोगों को अपना शिकार बनाने के लिए नए-नए तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। साइबर अपराधी पहले से ज्यादा चालाक हो गए हैं।
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साइबर ठग ऐसे लोगों को खोजते हैं, जो पार्ट टाइम नौकरी की तलाश में होते हैं, इसके बाद उनसे संपर्क करते हैं और उन्हें अपने जाल में फंसाते हैं।
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साइबर अपराधी किसी कंपनी का अधिकारी या फिर एचआर बनकर लोगों को नौकरी का झांसा देते हैं, इसके बाद लोगों को अपनी बातों में फंसाकर उन्हें नौकरी करने के लिए राजी कर लेते हैं।
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इसके बाद साइबर अपराधी लोगों को फर्जी नौकरी का ऑफर लेटर भेजते हैं, जिसमें वह फिशिंग लिंक या कोई मैलवेयर डाल देते हैं।
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नौकरी तलाश रहा शख्स जैसे ही उस लिंक पर क्लिक करता है तो उसका डिवाइस का कंट्रोल साइबर अपराधी के हाथ में हो जाता है, या फिर डिवाइस हैक हो जाता है। इसके बाद बैंक अकाउंट खाली हो सकता है।
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कई बार साइबर अपराधी नौकरी का फॉर्म भरने के लिए किसी एप को स्मार्टफोन में इंस्टाल करने के लिए भी कहते हैं, इस वजह से डिवाइस हैक हो सकता है।
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वहीं, कई बार साइबर अपराधी लोगों को नौकरी देने के नाम पर उनसे चार्ज के तौर पर कुछ पैसे लेते हैं, इस दौरान लोगों की बैंकिंग जानकारी भी मांग लेते हैं।