अमर उजाला
Sat, 2 March 2024
भारत की पूर्व टेनिस स्टार सानिया मिर्जा ने समाज में महिलाओं की सफलता को लेकर आत्मनिरीक्षण करने की अपील की है
कुछ महीने पहले पाकिस्तान के पूर्व कप्तान शोएब मलिक से तलाक लेने वाली पूर्व भारतीय खिलाड़ी ने समाज में अभी भी लिंग भेदभाव को दर्शाया है
सानिया ने एक विज्ञापन 'छोटी सोच' पर रिएक्ट किया है और सोशल मीडिया पर उसे एक प्रेरित करने वाला मैसेज पोस्ट किया
विज्ञापन में दिखाया गया था कि कैसे एक समाज एक महिला की सफलता का अवमूल्यन करता है। विज्ञापन में सामाजिक कलंक के कारण संघर्ष के दौरान एक स्वतंत्र महिला की भावनाओं को भी चित्रित किया गया है
इस विज्ञापन में एक महिला अपने भाई को समझाती है कि कैसे औरत जितना आगे बढ़ती है, दुनिया की सोच उतनी छोटी होती जाती है. ऐसा इसलिए क्योंकि लोग उसकी जीत को स्वीकार ही नहीं करना चाहते हैं
इसी विज्ञापन को रिट्वीट करते हुए सानिया ने लिखा- 2005 में मैं WTA खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला थी। बड़ी बात, है न?
उन्होंने लिखा- जब मैं डबल्स में दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी थी तो लोग यह जानने के लिए बेचैन थे कि मैं घर कब बसाउंगी। छह ग्रैंड स्लैम जीतना समाज के लिए काफी नहीं था
सानिया ने लिखा- मैं अपने सफर में मिले समर्थन के लिए आभारी हूं, लेकिन खुद को ये सोचने से नहीं रोक सकी कि क्यों एक महिला की उपलब्धियां उसके कौशल और काम के बजाय लैंगिक 'अपेक्षाओं' और दिखावे के बारे में चर्चाओं को आमंत्रित करती हैं
उन्होंने आगे लिखा- मैं जानती हूं कि समाज के बारे में वास्तविक बातचीत करना कठिन और कभी-कभी असुविधाजनक होता है, लेकिन हम महिलाओं की सफलता के साथ कैसे जुड़ते हैं, इस पर आत्मनिरीक्षण करना जरूरी है
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