राम-सीता के वैवाहिक जीवन से सीखें ये बातें

अमर उजाला

Wed, 22 February 2023

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हर परिस्थिति में साथ रहना 

जब भगवान राम को वनवास सुनाया गया तो माता सीता भी उनके साथ महल छोड़कर जंगल में रहने के लिए तैयार हो गईं, इस तरह से राम-सीता के वैवाहिक जीवन से हमें सीख लेनी चाहिए कि पति-पत्नी को हमेशा हर परिस्थिति में एक-दूसरे का साथ निभाना चाहिए
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त्याग की भावना

माता सीता राजा जनक की पुत्री थी, उन्होंने बचपन से ही अपना जीवन महल में बिताया था, विवाह के पश्चात भी वे जनकपुरी से अयोध्या आई, परंतु उन्होंने भगवान राम के लिए सभी सुखों का त्याग कर दिया और उनके साथ वन में जाने का निर्णय लिया
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निःस्वार्थ भाव से प्रेम

प्रभु श्री राम और माता सीता ने हमेशा एक दूसरे से निस्वार्थ भाव से प्रेम किया, इसलिए हर परिस्थिति में एक दूसरे के साथ रहे और उनका रिश्ता मजबूत बना रहा
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पतिव्रता और पत्नीव्रता

सीता-राम ने जीवन भर पतिव्रता और पत्नीव्रता होने का धर्म निभाया, रावण द्वारा हरण के बाद भी माता सीता ने अपनी इज्जत पर आंच न आने दी, वहीं राम भी एक राजा होते हुए भी उन्होंने सीता के दूर जाने के बाद भी दूसरी स्त्री से विवाह नहीं किया
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भरोसा

रावण जब अपहरण कर माता सीता को लंका ले गया तो माता सीता ने हार नहीं मानी, क्योंकि उन्हें भगवान राम पर पूरा भरोसा था कि वो आएंगे और रावण का अंत कर मुझे यहां से ले जाएंगे
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ईमानदारी 

माता सीता और भगवान राम के वैवाहिक जीवन से हमें सीखना चाहिए कि एक-दूसरे के प्रति ईमानदार कैसे रहा जाए, यदि आप रिश्ते को मजबूत बनाना चाहते हैं तो एक-दूसरे के प्रति ईमानदार रहें
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