अमर उजाला
Thu, 21 September 2023
इनके माता-पिता शिव जी के परम भक्त थे, माना जाता है कि स्वंय भगवान शिव ने शंकराचार्य के रूप में जन्म लिया था
बचपन में उनका नाम शंकर रखा गया, जो आगे चल कर आदि गुरु शंकराचार्य कहलाए
आदि शंकराचार्य बचपन से ही प्रतिभाशाली थे, कम उम्र में उन्हें वेदों का पूरा ज्ञान हो गया था और 12 वर्ष की उम्र में शास्त्रों का अध्ययन कर लिया था
इतना ही नहीं मात्र 16 वर्ष की उम्र में शंकराचार्य 100 से भी अधिक ग्रंथों की रचना कर चुके थे
आदि शंकराचार्य ने हिन्दू धर्म का प्रचार-प्रसार के लिए देश के चारों कोनों में मठों की स्थापना की थी, जिसे आज शंकराचार्य पीठ कहा जाता है
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