अमर उजाला
Tue, 11 March 2025
अर्थनाशं मनस्तापं गृहे दुश्चरितानि च। वञ्चनं चाऽपमानं च मतिमान्न प्रकाशयेत् ।।
प्रेमानंद जी महाराज ने बताया क्या है जीवन का अंतिम और परम सत्य