अमर उजाला
Thu, 3 October 2024
आचार्य चाणक्य ने एक महान ग्रंथ की रचना की है, जिसे चाणक्य नीति के नाम से जाना जाता है
इस नीति शास्त्र में राजनीति, युद्ध और जीवन से जुड़े सभी पहलुओं का उल्लेख है जिनका आज भी पालन किया जाता है
चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में उस घर का वर्णन भी किया है, जहां हमेशा लक्ष्मी जी का वास होता है
मूर्खा यत्र न पूज्यन्ते धान्यं यत्र सुसञ्चितम्।
दम्पत्येः कलहो नाऽस्ति तत्र श्रीः स्वयमागता ।।
चाणक्य के इस श्लोक का अर्थ है कि जिस घर में मूर्ख लोगों की बजाय गुणवानों का आदर-सम्मान किया जाता है वहां संपत्ति अपने-आप बढ़ने लगती हैं
कुछ घरों में हमेशा लड़ाई-झगड़ा होता रहता है, जिसके चलते व्यक्ति तनाव से घिरा रहता है और उसका कार्य प्रभावित होता है
चाणक्य के अनुसार ऐसे घरों में कभी भी बरकत नहीं होती है। वहां हमेशा आर्थिक तंगी बनी रहती है
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