अमर उजाला
Thu, 27 February 2025
वहीं चाणक्य के अपने नीति शास्त्र में सुखी परिवार का उल्लेख भी किया है
मूर्खा यत्र न पूज्यन्ते धान्यं यत्र सुसञ्चितम्। दम्पत्येः कलहो नाऽस्ति तत्र श्रीः स्वयमागता ।।
जीवन में इन लोगों से न रखें मित्रता