सुखी जीवन के लिए आचार्य चाणक्य की इस बात को बांध लें गांठ

अमर उजाला

Thu, 27 February 2025

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  • आचार्य चाणक्य ने 'चाणक्य नीति' नामक ग्रंथ की रचना की है, जिसमें जीवन से जुड़ी कई समस्याओं का जिक्र हैं
  • इस नीति शास्त्र का अध्ययन करने पर व्यक्ति को जीवन और लक्ष्य के प्रति नए नजरिए की प्राप्ति होती हैं

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वहीं चाणक्य के अपने नीति शास्त्र में सुखी परिवार का उल्लेख भी किया है

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चाणक्य के अनुसार 

मूर्खा यत्र न पूज्यन्ते धान्यं यत्र सुसञ्चितम्।
दम्पत्येः कलहो नाऽस्ति तत्र श्रीः स्वयमागता ।।

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  • इसका अर्थ है कि जिस घर में मूर्ख लोगों की बजाय गुणवानों का आदर-सम्मान किया जाता है
  • वहां संपत्ति अपने-आप बढ़ने लगती हैं और घर की कलह भी दूर होती है
     

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चाणक्य के अनुसार

यस्य पुत्रो वशीभूतो भार्या छन्दाऽनुगामिनी ।
विभवे यश्च सन्तुष्टस्तस्य स्वर्ग इहैव हि ।।
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  • इस श्लोक के अनुसार जिसका पुत्र वश में है, स्त्री भी इच्छा के अनुसार काम करती है
  • और व्यक्ति अपने कमाए हुए धन से संतुष्ट है, ऐसे लोग हमेशा सुखी रहते हैं 

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जीवन में इन लोगों से न रखें मित्रता

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