अमर उजाला
Fri, 4 October 2024
आचार्य चाणक्य के अपने नीति शास्त्र में सुखी परिवार का उल्लेख किया है
उनका मानना है कि 'मूर्खा यत्र न पूज्यन्ते धान्यं यत्र सुसञ्चितम्। दम्पत्येः कलहो नाऽस्ति तत्र श्रीः स्वयमागता ।।
इसका अर्थ है कि जिस घर में मूर्ख लोगों की बजाय गुणवानों का आदर-सम्मान होता है, उस परिवार में हमेशा खुशियां रहती हैं
साथ ही ऐसे परिवार के लोग तरक्की भी करते हैं
आचार्य चाणक्य के अनुसार यस्य पुत्रो वशीभूतो भार्या छन्दाऽनुगामिनी ।विभवे यश्च सन्तुष्टस्तस्य स्वर्ग इहैव हि ।।
यानी की जिसका पुत्र वश में है, स्त्री भी इच्छा के अनुसार काम करती है, और व्यक्ति अपने कमाए हुए धन से संतुष्ट है,
ऐसे लोग हमेशा सुखी रहते है, साथ ही ऐसे परिवार में हमेशा खुशियों का वास होता है
ऐसे घरों में खुद चली आती हैं मां लक्ष्मी