अमर उजाला
Mon, 7 April 2025
भारत एक ऐसा देश है जहां विविधताओं में भी एकता बसती है, खासकर जब बात हो धर्म और त्योहारों की हो
ऐसा ही एक दिलचस्प उदाहरण है हनुमान जयंती, जो हर साल दो बार धूमधाम से मनाई जाती है
अमांत पंचांग, जहां महीनों का समापन अमावस्या से होता है, यह प्रणाली विशेषकर दक्षिण भारत में मान्य है
पूर्णिमांत पंचांग, जिसमें महीनों की समाप्ति पूर्णिमा से होती है, यह उत्तर भारत में अधिक उपयोग में लाई जाती है
इन दोनों पंचांगों में महीनों की गणना अलग-अलग होने के कारण हनुमान जी का जन्मदिन अलग-अलग तिथियों पर आता है, और इसीलिए यह पर्व साल में दो बार मनाया जाता है
उत्तर भारत में, यह उत्सव चैत्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है, जो आमतौर पर मार्च या अप्रैल में पड़ती है, वहीं, दक्षिण भारत में, हनुमान जयंती मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी या फिर चित्रा पूर्णिमा (अप्रैल-मई) को मनाई जाती है, जो उनकी भक्ति और सेवा भाव को श्रद्धांजलि देने का माध्यम बनती है
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