अमर उजाला
Fri, 23 June 2023
पौराणिक मान्यता के अनुसार जब श्रीकृष्ण की लीला अवधि पूर्ण हुई तो वे देह त्याग कर बैकुंठ चले गए
उनके पार्थिव शरीर का पांडवों ने दाह संस्कार किया लेकिन इस दौरान उनका दिल जलता ही रहा
पांडवों ने उनके जलते हुए दिल को जल में प्रवाहित कर दिया, तब यह दिल लट्ठे के रूप में परिवर्तित हो गया
हालांकि बारह वर्ष बाद जब भगवान जगन्नाथ की मूर्ति बदली जाती है तब ये दिल निकाला जाता है
आश्चर्य की बात तो यह है कि जगन्नाथ पुरी मंदिर के पुजारियों ने भी इसे कभी नहीं देखा है, दिल यानी लट्ठा परिवर्तन के समय पुजारी की आंखों पर पट्टी बांध दी जाती है
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